छत्तीसगढ़ में महाभारत कालीन मूर्तियां मिलीं

रायपुर, 26 अप्रैल (आईएएनएस/वीएनएस)। छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ‘ननिहाल’ कहा जाता है। श्रीराम के वनगमन के कई प्रमाण यहां मिल चुके हैं। हाल ही में पुरातात्विक खुदाई में महाभारत काल के कर्ण और अर्जुन की दुर्लभ प्रतिमाएं मिलने से छत्तीसगढ़ का संबंध महाभारत काल से होना भी प्रमाणित हुआ है। प्रदेश की नदियों के किनारे सभ्यता थी, इसकी भी पुष्टि हो रही है।

रायपुर, 26 अप्रैल (आईएएनएस/वीएनएस)। छत्तीसगढ़ को भगवान श्रीराम का ‘ननिहाल’ कहा जाता है। श्रीराम के वनगमन के कई प्रमाण यहां मिल चुके हैं। हाल ही में पुरातात्विक खुदाई में महाभारत काल के कर्ण और अर्जुन की दुर्लभ प्रतिमाएं मिलने से छत्तीसगढ़ का संबंध महाभारत काल से होना भी प्रमाणित हुआ है। प्रदेश की नदियों के किनारे सभ्यता थी, इसकी भी पुष्टि हो रही है।

बिलासपुर जिले के विजयपुर गांव में संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा कराए जा रहे नदियों के सर्वे व खुदाई में सैकड़ों साल पुरानी प्रतिमाएं मिली हैं। इस गांव में मनियारी नदी के तट पर अर्जुन और कर्ण की प्रतिमाएं मिली हैं।

पुरातत्व विभाग के अधिकारी डॉ. शिवाकांत वाजपेयी का कहना है कि विजयपुर में अर्जुन-कर्ण की प्रतिमाएं मिली हैं। इसके साथ ही यहां राजपुरुष की प्रतिमा, कुछ कलाकृतियां और सूक्ष्म पाषाण भी प्राप्त हुए हैं।

वहीं संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के संचालक राकेश चतुर्वेदी ने भी मनियारी के सर्वेक्षण में कई पुरातात्विक खजाने मिलने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के छोटी नदियों का सर्वेक्षण पुरातात्विक महत्व के लिए किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ के संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग द्वारा प्रदेश की छोटी नदियों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है, ताकि यह पता लग सके कि यहां प्राचीनकाल में किस तरह की सभ्यता रही होगी। मनियारी नदी के किनारे स्थित तालागांव में रुद्र शिव की प्रतिमा से विख्यात है। विजयपुर तालागांव से करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।

छत्तीसगढ़ में नदियों के किनारे प्राचीन सभ्यता थी, इसके प्रमाण समय-समय पर पुरातात्विक खुदाई में मिलते रहे हैं। फिर चाहे वह गरियाबंद के पांडुका के पास मिले बंदरगाह के अवशेष हों, या फिर सिरपुर में महानदी के किनारे मिले पुरातात्विक महत्व की मूर्तियां हों। अभी हाल ही में बिलासपुर के मनियारी नदी के किनारे हुई खुदाई में अर्जुन-कर्ण की प्रतिमाएं मिलने से जाहिर होता है कि छत्तीसगढ़ का संबंध महाभारत काल से भी है।

भगवान श्रीराम के वनवास काल के दौरान छत्तीसगढ़ से गुजरने और उनका ननिहाल छत्तीसगढ़ में होने के भी प्रमाण मिले हैं। वहीं महासमुंद के अंतर्गत आने वाले भीमखोज (खल्लारी) में भी भीम के पांव के चिह्न् और पांडवों द्वारा खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए चूल्हे के भी प्रमाण मौजूद हैं।

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