छत्तीसगढ़ में सलवा जुडूम आंदोलन के बाद 624 से अधिक गांव खाली हो गए थे। वहीं नक्सलियों ने इस आंदोलन के बाद हिंसक घटनाओं में वृद्धि कर दी थी। सुरक्षा बल के सहयोग के लिए विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) की भी भर्ती की गई थी। प्रदेश सरकार गांव छोड़कर आए ग्रामीणों के लिए सलवा जुडूम कैंप भी कई महीनों तक चलाया था। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर सलवा जुडूम आंदोलन ने दम तोड़ दिया।
दो साल पहले झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में दिवंगत महेंद्र कर्मा के बेटे छविंद्र कर्मा ने 25 मई को अपने पिता के शहादत दिवस के रूप में मनाने और सलवा जुडूम-2 शुरू करने की घोषणा की थी और बाद में कांग्रेस व अन्य दलों के विरोध के कारण अपना निर्णय स्थगित कर दिया।
महेंद्र कर्मा की पुण्यतिथि सोमवार को ग्राम फरसपाल में आयोजित की गई थी। वहां शामिल हुए बस्तर के पुलिस महानिरीक्षक कल्लूरी ने महेंद्र कर्मा परिवार के समक्ष सलवा जुडूम आंदोलन को व्यक्तिगत रूप से सही ठहराया। इससे अब चर्चा शुरू हो गई है कि छविंद्र कर्मा के सलवा जुडूम पार्ट-2 को क्या सरकार और पुलिस का अघोषित समर्थन था?
इधर, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल ने सलवा जुडूम-2 को मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और बस्तर आईजी एसआरपी कल्लूरी की सोची-समझी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने छविंद्र कर्मा को मोहरा बनाने की कोशिश का आरोप भी लगाया।
बघेल झीरम घाटी जनसंहार की दूसरी पुण्यतिथि के मौके पर जगदलपुर में मीडिया से मुखातिब थे।
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