जंतर मंतर पर जुटे किन्नर, संवैधानिक मान्यता का मनाया जश्न

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। किन्नरों को तृतीय लिंग के रूप में मान्यता दिए जाने से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले की पहली वर्षगांठ का जश्न मनाने के लिए देशभर के किन्नर यहां बुधवार को जमा हुए।

इस मौके पर किन्नरों ने देश भर में नेत्रदान अभियान चलाने तथा दो लाख से भी अधिक लोगों ने नेत्रदान करने की शपथ ली। कथित तौर पर देश में इतनी बड़ी संख्या में नेत्रदान की शपथ पहली बार ली गई है।

किन्नर समुदाय के संघर्ष में अहम भूमिका निभाने वाली किन्नर कार्यकर्ता लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने आईएएनएस से कहा, “समाज में किन्नरों को हेय ²ष्टि से देखा गया। हमारा हर कदम पर बहिष्कार हुआ। एक साल पहले सर्वोच्च न्यायालय ने जो ऐतिहासिक फैसला सुनाया, वह हमारा अधिकार था। इससे यह साबित हो गया कि हम भी समाज का हिस्सा हैं। मैं बहुत आशावादी हूं। हमें प्रधानमंत्री मोदी जी से बहुत उम्मीदें हैं।”

किन्नरों के कल्याण के भावी कदम के बारे में त्रिपाठी ने कहा कि यूजीसी ने किन्नरों के लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने कहा कि समुदाय का राष्ट्रीय सम्मेलन जल्द होने जा रहा है, जिसमें भावी रणनीति तय की जाएगी।

नेत्रदान अभियान ‘आई फॉर एन आई’ की शुरुआत देश में चश्मों के कारोबार में सक्रिय कंपनी लेंसकार्ट ने आई बैंक एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ईबीएआई) के साथ मिलकर की।

‘आई फॉर एन आई’ अभियान के बारे में लेंसकार्ट के मुख्य कार्यकारी निदेशक (सीईओ) पीयूष गोयल ने आईएएनएस को बताया, “आई फॉर एन आई अभियान यानी आंख के बदले आंख। इसे अमूमन गलत संदर्भ में लिया जाता है। लेकिन इसका बहुत सकारात्मक अर्थ है, कि हमारी दान की हुई आंखों से कोई इस दुनिया की खूबसूरती देख सकता है। इसलिए हमारा लक्ष्य है कि देश का प्रत्येक सदस्य देखने में सक्षम हो और हम उसी दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।”

इस मौके पर मौजूद स्वामी अग्निवेश ने कहा, “नेत्रदान इंसान होने का फर्ज निभाना है। साल भर पहले किन्नर समुदाय को सामाजिक दर्जा मिलने से इंसानियत की जीत हुई थी और आज नेत्रदान अभियान की घोषणा कर एक बार फिर इंसान होने का दायित्व निभाया गया है। किन्नरों को शिक्षा, नौकरियों आदि में आरक्षण मिलें और उन्हें प्रोत्साहित किया जाए।”

किन्नरों पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला 15 अप्रैल, 2014 को आया था।

इस ऐतिहासिक फैसले को सुनाने वाले सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.के.सीकरी और न्यायमूर्ति के.एस.राधाकृष्णन का भी इस मौके पर आभार व्यक्त किया गया।

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