अनिल गिरी
अनिल गिरी
काठमांडू, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। दो दिवसीय दौरे पर गुरुवार को काठमांडू पहुंचे भारतीय विदेश सचिव एस. जयशंकर ने जोर देकर कहा कि भारत सदैव से हिमालय की गोद में बसे नेपाल देश में शांति, स्थिरता और विकास के साथ खड़ा रहा है और इसकी समृद्धि, स्थिरता एवं शांतिपूर्ण रहने के प्रयास का समर्थन करने को तैयार है।
उन्होंने कहा कि नेपाल के विदेश मंत्री महेंद्र बहादुर पांडे और नेपाल के विदेश सचिव शंकर दास बैरागी के साथ यह पृथक बातचीत है।
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) देशों की यात्रा के क्रम में काठमांडू पहुंचे जयशंकर ने नेपाल के विदेश सचिव बैरागी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। दोनों पक्षों ने नेपाल और भारत के बीच अगस्त 2014 में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे और भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की नेपाल यात्रा के दौरान हुए समझौतों की समीक्षा की।
दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय हितों की परियोजनाओं के लागू होने में अभी तक हुई प्रगति पर और क्षेत्रीय एवं दक्षेस सहित वैश्विक चिंताओं से जुड़े मुद्दों पर भी विचार किया।
नेपाल के विदेश सचिव ने बैठक के बाद कहा, “हमने भारतीय पक्ष को आश्वस्त किया कि हम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के प्रयास (स्थायी जगह पाने के लिए) का समर्थन करेंगे।”
उन्होंने कहा, “हम भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति का स्वागत करते हैं। मैंने पाया कि भारतीय विदेश सचिव द्विपक्षीय मोर्चे पर प्रगति बढ़ाने की तरफ अत्यंत प्रतिबद्ध हैं।”
बातचीत के दौरान पंचेश्वर बहुद्देश्यीय परियोजना, दोनों पक्षों पर फील्ड सर्वे संयुक्त रूप से कराकर सीमा विवाद का समाधान करना, नेपाल और भारत के बीच पेट्रोलियम पाइपलाइन का निर्माण भी सामने आया।
इससे पहले काठमांडू के त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे पर पहुंचने के बाद जयशंकर ने कहा, “दक्षेस यात्रा के दौरान इस खूबसूरत शहर में घूमना अत्यंत सुखद है। मेरी यह यात्रा हमारी सरकार के नेपाल के साथ संबंधों के महत्व को दर्शाती है।”
जयशंकर नेपाल में प्रमुख पार्टियों के शीर्ष नेताओं से भी मुलाकात करेंगे, जिनमें सत्तारूढ़ नेपाल कांग्रेस, नेपाल की कम्युनिस्ट पार्टी यूनिफाइड मार्किस्ट लेनिनिस्ट (सीपीएन-यूएमएल) और विपक्षी पार्टी यूनिफाइड कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल-माओवाद (यूसीपीएन-एम) शामिल हैं।
जयशंकर शुक्रवार को राष्ट्रपति रामबरन यादव, प्रधानमंत्री सुशील कोईराला, यूसीपीएन (माओवादी) नेता पुष्प कमल दहल प्रचंड एवं अन्य राजनीतिक नेताओं से मुलाकात करेंगे।
जयशंकर द्वारा दक्षेस सदस्य देशों की यात्रा करने का यह दूसरा चरण है। इससे पहले उन्होंने एक मार्च को भूटान का दौरा किया था। उन्होंने तीन मार्च को पाकिस्तान और चार मार्च को अफगानिस्तान की यात्रा की थी।
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