समाचार पत्र ‘अल-शर्क अल अवसत’ ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
यह प्रशिक्षण दोनों देशों के गृह मंत्रालयों द्वारा हस्ताक्षरित एक सुरक्षा समझौते का हिस्सा है। सऊदी जनरल डॉयरेक्टोरेट ऑफ बॉर्डर गार्ड ने बताया कि इस प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागी नए सुरक्षा कौशल जैसे संदिग्ध स्थिति में गिरफ्तारी, जांच और हिरासत में ली गई महिलाओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरण करने जैसे कार्यो को सीखेंगी।
सऊदी सीमाओं पर करीब 60 महिला कर्मियों को महिला यात्रियों या संदिग्धों की निगरानी के लिए तैनात किया गया है। सऊदी अरब में पुरुष सुरक्षाकर्मियों को महिलाओं या फिर संदिग्ध महिलाओं से संबंधित किसी मामले को सुलझाने की अनुमति नहीं है।
इस प्रशिक्षण की घोषणा पिछले सप्ताह प्रकाशित हुईं इन रिपोर्ट के बाद की गई है, जिसमें कहा गया था कि सऊदी अरब में महिलाओं के प्रति रूढ़िवादी रवैये का लाभ आतंकवादी और इनके संगठन आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए उठा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब में अधिकांश महिलाएं परदे में पूरी तरह से ढकी हुई होती हैं। काले रंग के अबाया (एक तरह का बुर्का) में ही वे घर से निकलती हैं। इसी परिधान का इस्तेमाल आतंकी सुरक्षाकर्मियों से बचने के लिए कर रहे हैं। सुरक्षा संस्थाओं के आतंकी रोधी अभियान में संदिग्धों को पकड़े जाने से इस तथ्य का खुलासा हुआ। कुछ संगठनों ने आतंकवादी अभियानों के समन्वय के लिए महिलाओं की भर्तियां भी की हैं। यही नहीं, महिला के साथ होने से आतंकियों के लिए आवासीय इलाकों में घर किराए पर लेना आसान हो जाता है।
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