चीनी प्रशासन के एक अज्ञात अधिकारी ने कहा कि हाथों से लिखी गई जुर्म की ये स्वीकारोक्तियां चीनी भाषा में अनुदित हैं और इसका सार संक्षेप चीनी तथा अंग्रेजी दोनों ही भाषाओं में उपलब्ध हैं। इसे स्टेट अरकाइब्स एडमिनिस्ट्रेशन की वेबसाइट पर प्रकाशित किया जा रहा है। 11 अगस्त से प्रतिदिन एक स्वीकारोक्ति का प्रकाशन किया जा रहा है।
अधिकारी ने कहा, “ये अभिलेख जापानी साम्राज्यवादियों द्वारा चीनियों के खिलाफ किए गए जघन्य अपराधों के ठोस सबूत हैं।”
पहले कभी सामने न आई जुर्म की उन स्वीकारोक्तियों में जापानियों द्वारा हत्या, दास बनाना और चीनियों को जहर देकर मारना तथा मानव के खिलाफ जैविक व रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल सहित कई अपराधों का लेखा-जोखा शामिल है।
इस श्रृंखला में पहली स्वीकारोक्ति केंजो सुगिशिता की है, जिसका जन्म 1901 में हुआ था और वह चीन के खिलाफ जापान की लड़ाई में 1932 में शामिल हुआ था।
केंजो सुगिशिता ने अपनी स्वीरोक्ति में कहा है कि तीन फरवरी, 1932 को उसने शंघाई में तियानले मंदिर से आठ किलोमीटर दक्षिण में स्थित एक गांव में लोगों पर अंधाधुंध गोली चलाने का आदेश दिया था, जिसमें 30 चीनी नागरिक मारे गए थे।
उसने कहा है, “19 फरवरी, 1932 को मैंने लगभग छह साल के एक बच्चे को लुजिया ब्रिज में एक घर में लगाई गई आग से बचकर भागते हुए पकड़ लिया, जिसके बाद पत्थर से मार-मारकर उसकी हत्या कर दी और उसके शव को जलते घर में फेंक दिया।”
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