नई दिल्ली, 20 नवंबर (आईएएनएस)। वस्तु एवं सेवाकर (जीएसटी) परिषद की यहां रविवार को हुई एक अनौपचारिक बैठक दोहरे नियंत्रण या एक-दूसरे की शक्ति के मुद्दे पर अटक गई। मुद्दा यह है कि जीएसटी कर निर्धारण पर किसका नियंत्रण रहेगा-केंद्र का या फिर राज्य का?
जीएसटी परिषद की बैठक की अध्यक्षता कर रहे केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने करीब तीन घंटे तक राज्यों के वित्त मंत्रियों के साथ बैठक करने के बाद संवाददाताओं से कहा, “यह बैठक अब भी अधूरी है। 25 नवंबर को फिर बातचीत होगी।”
पूरे देश में अप्रत्यक्ष कर की इस नई व्यवस्था में राज्य 1.5 करोड़ रुपये तक के वार्षिक कारोबार पर कर लगाने का अधिकार अपने पास रखना चाहते हैं।
इसी माह हुई इससे पहले की बैठक में जीएसटी की बैठक में कर दरों के चार वर्ग तय किए थे। लेकिन, दोहरे नियंत्रण को लेकर किसी फैसले पर नहीं पहुंचा जा सका था।
इसके बाद इस मुद्दे को सुलझाने के लिए 20 नवंबर को अनौपचारिक बैठक करना तय हुआ था।
रविवार की बैठक के बाद जेटली ने कहा कि यह तय किया गया है कि अधिकारी सोमवार (21 नवंबर) को फिर बैठेंगे। परिषद की अगली बैठक 25 नवंबर को होनी है।
सरकार ने 1 अप्रैल 2017 से जीएसटी लागू करने का लक्ष्य रखा है।
जीएसटी अप्रत्यक्ष कर की एकल व्यवस्था है जिसमें केंद्र और राज्य सरकार के सभी कर जैसे मूल्य संवर्धित कर, सेवा कर, केंद्रीय बिक्री कर, उत्पाद शुल्क, अतिरिक्त सीमा शुल्क और विशेष अतिरिक्त सीमा शुल्क जैसे करों को एक ही कर व्यवस्था में समाहित करने का प्रावधान है।
विपक्षी दलों ने नोटबंदी के कदम के बाद सरकार पर संसद के अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर हमले शुरू कर दिए हैं। इस वजह से प्रस्तावित जीएसटी के भविष्य को लेकर प्रश्नचिन्ह लग गया है।
कांग्रेस ने कहा है कि वह 28 फीसदी तक के चार स्तरों वाले जीएसटी का संसद के शीतकालीन सत्र में विरोध करेगी।
कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इसी हफ्ते के शुरू में कहा था कि कांग्रेस पार्टी हमेशा से कहती रही है और आज भी कह रही है कि जीएसटी की अधिकतम सीमा 18 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। इससे अधिक कुछ भी महंगाई को बढ़ाएगा और इससे लोग और परेशान होंगे।
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