नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत सोना पर 3 फीसदी और बीड़ी पर 28 फीसदी कर वसूला जाएगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को जीएसटी परिषद की बैठक खत्म होने पर यह जानकारी दी।
इसके साथ ही जीएसटी परिषद ने सभी वस्तुओं और सेवाओं को जीएसटी के चार स्लैब के अंतर्गत रखने का कार्य पूरा कर लिया।
उद्योग जगत का कहना है कि व्यापारियों को अब बदलाव के लिए तैयार हो जाना चाहिए, क्योंकि जीएसटी के लागू होने में अब देरी की कोई संभावना नहीं है।
जीएसटी परिषद के अध्यक्ष जेटली ने परिषद की 15वीं बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, “सोना पर इस समय में 1 फीसदी उत्पाद शुल्क और राज्यों द्वारा 1 फीसदी वैट लगाया जाता है। इन दरों को ध्यान में रखते हुए परिषद ने काफी विचार-विमर्श के बाद सोना और स्वर्ण आभूषणों पर सर्वसम्मति से 3 फीसदी कर लगाने का फैसला किया है।”
उन्होंने कहा कि इसके अलावा अपरिष्कृत हीरे पर 0.25 फीसदी का मामूली कर लगाया गया है, ‘ताकि लेन-देन का हिसाब रखा जा सके’।
वहीं, बीड़ी पत्तों ‘तेंदू’ पर 18 फीसदी कर लगाया गया है, जबकि निर्मित बीड़ी पर 28 फीसदी कर लगाया गया है।
जेटली ने कहा, “बीड़ी या बीड़ी पत्तों पर कोई उपकर नहीं लगाया जाएगा, लेकिन सिगरेट पर उपकर लगेगा।”
जीएसटी में 500 रुपये से कम कीमत के जूता-चप्पलों पर 5 फीसदी तथा इससे अधिक कीमत के जूता-चप्पलों पर 18 फीसदी कर लगाया गया है।
मंत्री ने कहा कि निर्मित कपड़े जिनकी कीमत 1,000 रुपये से कम होगी, उस पर 5 फीसदी कर लगेगा।
जेटली ने कहा, “सभी श्रेणी के कपड़ों पर 5 फीसदी तथा तैयार परिधानों पर 12 फीसदी कर लगेगा।”
उन्होंने कहा, “पंजीकृत ट्रेड मार्क के तहत बेचे जाने वाले खाद्य पदार्थो (जो खाद्य पदार्थ के मूल्य से अधिक कीमत पर बेचे जाते हैं) पर 5 फीसदी कर लगेगा।”
वित्त मंत्री ने कहा कि सभी तरह के महंगे-सस्ते बिस्कुट पर 18 फीसदी कर लगेगा।
उन्होंने कहा कि जीएसटी दरों पर पुनर्विचार के कई आवेदन प्राप्त हुए हैं। उन पर विचार करने के लिए यहां 11 जून को एक बार फिर जीएसटी परिषद की बैठक होगी।
वहीं, शनिवार को हुई बैठक में जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) ने 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने को लेकर अपनी तैयारियों के बारे में विस्तृत प्रस्तुति दी।
जेटली ने कहा, “जीएसटीएन ने परिषद को आश्वस्त किया कि वह 1 जुलाई से जीएसटी को लागू करने को लेकर पूरी तरह से तैयार है।”
हालांकि बैठक के बाद पश्चिम बंगाल के वित्त मंत्री अमित मित्रा ने एकबार फिर जीएसटीएन की तैयारियों पर संदेह प्रकट किया।
उन्होंने कहा, “समूचा जीएसटी तंत्र जीएसटीएन की आईटी प्रणाली पर आश्रित है। उनके द्वारा दिए गए प्रस्तुतिकरण में यह स्पष्ट दिख रहा था कि वे अभी तैयार नहीं हैं और उन्हें अधिक समय की जरूरत है। उन्होंने पूरे देश में 34 सुविधा प्रदाताओं को नियुक्त किया है, क्या यह पर्याप्त होंगे?”
उन्होंने कहा, “हम जीएसटी का विरोध नहीं कर रहे। हम इसके समर्थन में हैं। लेकिन 1 जुलाई की समयसीमा को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। इस पर अभी और चर्चा की जरूरत है।”
जेटली से यह पूछे जाने पर कि परिषद की बैठक में मित्रा का क्या रुख था। जेटली ने कहा कि “उन्होंने अपनी राय नहीं दी।”
बीएमआर एंड एसोसिएट्स एलएलपी के लीडर (अप्रत्यक्ष कर) राजीव डिमरी का कहना है कि जीएसटी को 1 जुलाई से लागू करने के फैसले के साथ ‘अब उद्योग को तैयार हो जाना चाहिए’, क्योंकि ‘र्टिन फॉर्मेट और नियमों के बारे में पर्याप्त जानकारी अब सार्वजनिक डोमेन पर उपलब्ध है। इसलिए उद्योग के अब अपने आईटी सिस्टम को जरूरतों के मुताबिक तैयार कर लेना चाहिए’।
कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का कहना है, “व्यापारियों के स्तर पर बहुत तैयारियों की आवश्यकता है। जाहिर है कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिसे सुलझाया जाना चाहिए और इसके लिए परीक्षण अवधि की जरूरत है।”
सोने पर 3 फीसदी कर का स्वागत करते हुए वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के प्रबंध निदेशक (भारत) सोमासुंदरम पी. आर. ने इसे मौजूदा संदर्भ में उद्योग को स्थिरता प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित करने वाला कदम बताया और इसे उद्योग से जुड़े लाखों कर्मचारियोंकी चिंताओं को ध्यान में रखने वाला बताया।
कॉटन टेक्सटाइल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (टीईएक्सपीआरओसीआईएल) के अध्यक्ष उज्जवल लोहाटी ने कहा कि 5 फीसदी की दर बहुत प्रगतिशील है और पूरे मूल्य श्रृंखला के विकास को बढ़ावा देगी।
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