नई दिल्ली, 9 सितम्बर (आईएएनएस)। देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की गणना करने की नई पद्धति की औचित्यता को लेकर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बुधवार को चर्चा का स्वागत करते हुए कहा कि नई पद्धति में सरकार की कोई भूमिका नहीं है।
द इकनॉमिस्ट पत्रिका के सालाना सम्मेलन में यहां उन्होंने कहा, “केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) स्वायत्त तरीके से काम करता है।”
जेटली ने कहा, “जो मॉडल वे इस्तेमाल करते हैं, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय स्वीकृति मिली हुई है।”
जीडीपी गणना की नई पद्धति लागू करने के बाद भी इस पर बहस थमा नहीं है और जीडीपी विकास दर के हालिया आंकड़े पर कई ओर से सवाल उठ रहे हैं।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन ने सार्वजनिक तौर पर कहा था कि जीडीपी के नए आंकड़े को पचा पाना कठिन है और इसका विश्लेषण करने की जरूरत है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के प्रमुख प्रणब सेन की अध्यक्षता में नई गणना पद्धति की जांच करने के लिए एक समिति गठित की गई है। वह हालांकि नई पद्धति के मुखर समर्थक हैं।
वित्त मंत्री ने कहा, “इस बीच जीडीपी गणना और इस पर चर्चा दोनों जारी रहनी चाहिए, जिसका लोकतंत्र में हमेशा स्वागत है।”
मौजूदा कारोबारी साल की प्रथम तिमाही में जीडीपी विकास दर सात फीसदी रही है, जो इससे एक तिमाही पहले 7.5 फीसदी थी और एक साल पहले समान अवधि में 6.7 फीसदी थी।
विकास दर के ताजा आंकड़े कई अन्य आंकड़ों से मेल नहीं खाते हैं, जैसे सूचीबद्ध कंपनियों की आय में होने वाली वृद्धि, बैंकों के ऋण में वृद्धि, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक के आंकड़े, कमजोर मांग और कंपनियों पर भारी भरकम ऋण।
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