जेपी अस्पताल में लैप्रोस्कोपी कार्यशाला में 12 दुर्लभ सर्जरी

नोएडा, 8 नवंबर (आईएएनएस)। जेपी अस्पताल में लैप्रोस्कोपिक लाइव ऑपरेटिंग कार्यशाला एवं सम्मेलन -‘एंडोफर्ट 2017’ का आयोजन किया गया जिसमें 12 दुर्लभ सर्जरी की गई। तीन दिवसीय सम्मेलन की शुरूआत लैप्रोस्कोपिक प्रशिक्षण के साथ हुई।

लैप्रोस्कोपी एक ऐसी तकनीक है जिसे सीखने के लिए सालों के अभ्यास की जरूरत होती है। जेपी अस्पताल नोएडा की एसोसिएट डायरेक्टर, प्रसूति रोग विशेषज्ञ एवं लैप्रोस्कोपी विभाग की डॉ. ज्योति मिश्रा ने इस तकनीक का प्रदर्शन किया।

लाइव सर्जिकल कार्यशाला में जाने माने चिकित्सकों द्वारा 12 दुर्लभ लैप्रोस्कोपिक सर्जरियां की गईं। इसका मौजूद चिकित्सकों के लिए सजीव प्रसारण किया गया। सर्जरी के लिए खासतौर पर प्रख्यात गायनी लैप्रोस्कोपिक सर्जनों को बुलाया गया था। लाइव सर्जरी करने वाले कुछ सर्जनों में डॉ पी.जी. पॉल, डॉ. बी. रमेश, डॉ. सुधा टंडन और डा. ज्योति मिश्रा शामिल रहीं। समाज कल्याण के मद्देनजर जेपी अस्पताल ने सम्मेलन के दौरान जरूरतमंद मरीजों को इलाज के शुल्क में विशेष छूट भी दी।

लाईव कार्यशाला के बाद एंडोस्कोपी एवं फर्टीलिटी पर एकेडमिक सेशन्स का आयोजन किया गया। सम्मेलन में देश-विदेश से 150 से ज्यादा डाक्टरों ने हिस्सा लिया।

इस मौके पर जेपी अस्पताल, नोएडा की गायनेकोलोजी एवं लैप्रोस्कोपी विभाग एसोसिएट डायरेक्टर की डॉ. ज्योति मिश्रा ने कहा, “हिस्टेरो-लैप्रोस्कोपिक सर्जरी एक मिनीमल इनवेसिव तकनीक है जिसका इस्तेमाल कई रोगों जैसे फाइब्रोइड, ओवेरियन सिस्ट, यूट्रस रिमुवल (गर्भाशय निकालने), इनफर्टीलिटी (बांझपन), एंडोमीट्रिओसिस, यूट्राइन प्रोलेप्स, ब्लॉक हो चुकी ट्यूब को खोलने तथा यूरीन लीक (मूत्र रिसाव) में सुधार के लिए किया जाता है। ओपन सर्जरी के विपरीत लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में मरीज के शरीर पर छोटा छेद किया जाता है और सर्जरी/ शल्यक्रिया उत्कृष्ट सर्जिकल उपकरणों की मदद से की जाती है। इस प्रकार की सर्जरी में मरीज को दर्द कम होता है और वह जल्दी ठीक हो जाता है। उसे एक से दो दिनों में अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है।”

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493