नई दिल्ली, 9 अगस्त (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को जयप्रकाश एसोसिएट (जेएएल) व जेपी इंफ्राटेक (जेआईएल) के प्रमोटरों से कहा कि वे जेपी इंफ्राटेक के लिए बोली नहीं लगा सकते। जेपी इंफ्राटेक नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के समक्ष आईडीबीआई बैंक द्वारा शुरू की गई दिवाला कार्यवाही का सामना कर रही है।
अदालत ने अपने फैसले में कहा, “जेआईएल/जेएएल और इनके प्रमोटर धारा 29 ए के प्रावधान के प्रभाव के तहत कॉर्पोरेट दिवालिया प्रस्ताव प्रक्रिया (सीआईआरपी) में शामिल होने के योग्य नहीं हैं।”
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि इंसॉलवेंसी एंड बैंकरप्टसी कोड (आईबीसी) की धारा 29ए जेआईएल/जेएएल को प्रस्ताव प्रक्रिया में शामिल होने की इजाजत देने से रोकती है।
पीठ ने अपने फैसले में कहा, “इसके अलावा, जो तथ्य अदालत के ध्यान में लाए गए हैं, उससे यह स्पष्ट होता है कि जेआईएल/जेएएल के पास वित्तीय क्षमता और संसाधनों की कमी है, जिस कारण वह अपनी अधूरी परियोजनाएं पूरा नहीं कर सकते।”
पीठ की ओर से न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, “इन्हें प्रस्ताव की प्रक्रिया में शामिल होने की इजाजत देना अधिनियम के प्रावधानों को निर्थक बना देगा। अदालत द्वारा इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती।”
अदालत ने नौ अगस्त 2017 को प्रस्ताव प्रक्रिया को नए सिरे से शुरू करने का निर्देश दिया था। इसी दिन एनसीएलटी की इलाहाबाद पीठ ने एक अंतरिम प्रस्ताव पेशेवर भी नियुक्त किया था।
संविधान के अनुच्छेद 142 के सहारा लेते हुए अदालत ने कहा कि अंतरिम प्रस्ताव पेशेवर द्वारा दिवाला कार्यवाही पूरी करने के लिए 180 दिनों की अनिवार्य अवधि आज से शुरू होगी। अनुच्छेद 142 शीर्ष अदालत को किसी भी स्थिति पर काबू पाने की विस्तृत शक्तियां प्रदान करता है।
अदालत ने नई कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (सीओसी) के गठन का भी निर्देश दिया। कमेटी में घरों के खरीदारों की ओर से प्रतिनिधि शामिल होंगे, जिन्हें संशोधित इंसॉलवेंसी एंड बैंकरप्टसी कोड (आईबीसी) के तहत सामरिक लेनदारों के रूप में मान्यता दे दी गई है।
जय प्रकाश एसोसिएट द्वारा एनसीएलटी को दिए गए 750 करोड़ रुपये को हस्तांतरित करने का निर्देश देते हुए अदालत ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा बैंकों को जयप्रकाश एसोसिएट के खिलाफ दिवाला कार्यवाही शुरू करने के लिए आवेदन देने की अनुमित दे दी।
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