समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक, स्पाइसर ने हालांकि संकेत दिया कि ट्रंप इस करार को जारी रखेंगे। उन्होंने दोहराया कि शरणार्थियों की ‘अत्यधिक कड़ी’ जांच प्रक्रिया जारी रहेगी।
स्पाइसर ने गुरुवार को कहा, “राष्ट्रपति का लक्ष्य इस समझौते और आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री मैलकॉम टर्नबुल के साथ हुई टेलीफोन वार्ता के अनुरूप यह सुनिश्चित करना है कि शरण चाहने वाले प्रत्येक शख्स की बेहद कड़ी जांच की जाए।”
प्रवक्ता ने यह भी कहा कि ट्रंप, टर्नबुल और आस्ट्रेलियाईलोगों का बेहद सम्मान करते हैं।
वाशिंगटन पोस्ट की गुरुवार की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने शनिवार को टर्नबुल के साथ टेलीफोन वार्ता में 1250 शरणार्थियों को अमेरिका में शरण देने के करार पर नाराजगी व्यक्त की थी। टर्नबुल ने बातचीत में कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका करार के मुताबिक इन शरणार्थियों को अपने यहां शरण देगा।
ट्रंप ने इस करार को अब तक का सबसे खराब करार कहा था और बताया जा रहा है कि फोन को एक झटके में काट दिया था।
ट्रंप ने बुधवार को इस करार के बारे में ट्वीट किया था, “आप यकीन भी कर सकते हैं? ओबामा प्रशासन ने हजारों अवैध आव्रजकों को आस्ट्रेलिया से लेने का करार किया था। क्यों? मैं इस मूर्खतापूर्ण करार का अध्ययन करूंगा।”
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