‘ट्रंप-मोदी मुलाकात से अधिक उम्मीदें नहीं’

वाशिंगटन, 26 जून (आईएएनएस)। अमेरिका के एक समालोचक ने कहा है कि ट्रंप-मोदी के बीच मुलाकात से बहुत ज्यादा उपलब्धियों की उम्मीद नहीं की जानी चाहिए।

जोश रॉगिन ने वाशिंगटन पोस्ट में लिखा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति तथा भारत के प्रधानमंत्री के बीच सोमवार को होने वाली बैठक जर्मनी में जुलाई में होने वाली जी20 की बैठक से पहले निर्धारित की गई है, ताकि वहां होने वाली बैठक से पहले वे आपस में कुछ घुल-मिल सकें।

डोनाल्ड ट्रंप तथा नरेंद्र मोदी के बीच हालांकि कुछ चीजें समान हैं। रॉगिन ने कहा, “सवाल यह है कि मोदी तथा ट्रंप के बीच मुलाकात क्या केवल एक रात की बात होगी या फिर इसके भरपूर नतीजे सामने आएंगे।”

रॉगिन ने कहा कि चुनाव में जीत से पहले भारत से घनिष्ठ संबंध बनाने को लेकर ट्रंप द्वारा किए गए वादे को अभी धरातल पर उतरना बाकी है।

उन्होंने कहा, “एशिया की अन्य शक्तियों से अलग मोदी सरकार ने खुद को ट्रंप की टीम के सामने नतमस्तक नहीं किया है, इसके बजाय वे सतर्कता पूर्वक कदम रख रहे हैं।”

ट्रंप-मोदी की बैठक की मंशा अमेरिका-भारत रिश्ते को फिर से नई ऊंचाई पर ले जाना है।

रॉगिन ने कहा कि मोदी ने हाल में रूस, फ्रांस व जर्मनी का हाईप्रोफाइल दौरा किया है और अगर ट्रंप के मातहत वाशिंगटन से उन्हें वह नहीं मिला, जिसकी वह उम्मीद कर रहे हैं, तो वह इसके विकल्प पर भी विचार कर सकते हैं।

उन्होंने कहा, “कुछ बिंदुओं पर दोनों देशों को एच1बी वीजा, व्यापार की समस्या तथा बौद्धिक संपदा के प्रति भारत के दृष्टिकोण सहित कई मतभेदों से निपटना होगा।”

रॉगिन ने कहा, “ट्रंप सरकार को भारत के लिए अपनी विदेश नीति को अपनाना चाहिए, जिससे यह भरोसा मिले कि रणनीतिक हितों को समर्थन मिलेगा।”

उन्होंने कहा, “मोदी को इस बात का ट्रंप को पक्का विश्वास दिलाना होगा कि भारत पर ज्यादा समय व ध्यान देना उनके अमेरिका फर्स्ट के एजेंडे के लिए लाभकारी होगा।”

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