मुंबई, 20 जुलाई (आईएएनएस)। देश में 90 लाख से अधिक ट्रकों और लगभग 50 लाख बसों, टैंपो और पयटक वाहनों की शुक्रवार से शुरू हुई अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण परिवहन व्यवस्था चरमरा गई है। यह हड़ताल डीजल की कीमतें घटाने सहित विभिन्न मांगों के समर्थन में है।
बॉम्बे गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (बीजीटीए) के कोषाध्यक्ष और कानूनी प्रकोष्ठ के प्रमुख, अभिषेक गुप्ता ने आईएएनएस को बताया, “हड़ताल की प्रतिक्रिया बहुत अच्छी है। आवश्यक आपूर्ति को छोड़कर माल और लोगों के आवागमन जैसी सभी आर्थिक गतिविधियां महाराष्ट्र और समूचे भारत में ठहर गई हैं।”
माल को उठाने या डिलीवरी विनिर्माण स्थल से उपभोक्ता केंद्रों, हवाईअड्डों, बंदरगाहों और रेलवे यार्ड्स से माल परिवहन रोक दिया गया है, जबकि निजी बसें और पर्यटक वाहन और स्कूल बसें भी हड़ताल पर हैं।
गुप्ता ने कहा कि सरकारी स्वामित्व वाले वाहनों को छोड़कर मुंबई में पांच लाख से अधिक ट्रक और 8,000 से अधिक बसें हड़ताल पर हैं, जबकि महाराष्ट्र में 14,00,000 ट्रक हैं और लगभग 40,000 बसें हैं और करीब 60,000 टैंपो और पर्यटक वाहन हड़ताल में शामिल हैं।
ऑल इंडियन ट्रांसपोर्टर्स वेलफेयर एसोसिएशन (एआईटीडब्ल्यूए) के एक पदाधिकारी ने कहा कि अखिल भारतीय मोटर कांग्रेस द्वारा चक्का जाम (हड़ताल) का आह्रान किया गया, जिसे भारी समर्थन मिला है, क्योंकि इनके द्वारा उठाए गए मुद्दे मुख्य हितधारक ट्रक व बस ऑपरेटरों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं।
बीजीटीए कमेटी के सदस्य दीपक वर्मा के नेतृत्व में बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टरों ने भी मुंबई के आजाद मैदान में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया है।
एआईटीडब्ल्यूए की मुख्य मांगों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत इसे लाकर डीजल की कीमतें घटाना, मौजूदा दैनिक उतार-चढ़ाव के बजाय ईंधन की कीमतों में छह महीने का संशोधन और सभी सड़कों पर टोल टैक्स को समाप्त करना शामिल है।
dharmpath.com dharmpath