न्यूयॉर्क, 17 मई (आईएएनएस)। अगर आपको लगता है कि ट्विटर पर आपका उत्पीड़न किया जा रहा है, तो आप अकेले नहीं हैं। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है।
नारीवादी कार्यकर्ता समूह वूमैन, एक्शन एंड द मीडिया (वैम) द्वारा किए गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि अन्य बातों के अलावा लगभग एक चौथाई के आस-पास युवा पुरुषों और महिलाओं को शारीरिक रूप से ऑनलाइन धमकी दी जाती है और एक चौथाई युवा महिलाओं का यौन उत्पीड़न होता है।
द वर्ग की रपट के मुताबिक वैम को ट्विटर से अपनी रपट स्वीकार करने और प्रस्तुत करने की स्वीकृति मिल गई है। इसके साथ ही ट्विटर ने वैम से यह जानकारी मांगी है कि कौन किस प्रकार के ट्विटर अकाउंट और ट्वीट के खिलाफ शिकायत कर रहा है। साथ ही यह भी पूछा है कि ट्विटर उत्पीड़ित लोगों की कैसे सहायता कर सकता है।
वैम ने विशेष रूप से उत्पीड़न की 811 रपटों को ध्यान में रखकर अध्ययन किया।
एक चौथाई रपटों में अभद्र भाषा जैसे कि नस्लवादी, लैंगिकवादी अथवा समलैंगिक लोगों के खिलाफ अभद्र टिप्पणियां पाई गईं।
शोध में पाया गया है कि ट्विटर ऑनलाइन उत्पीड़न के मामलों में कमी लाने के कुछ प्रयास कर सकता है।
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