नई दिल्ली, 20 नवंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेशी फैशन के लिए यूरोप एक बड़ा बाजार है, लेकिन भारत के लिए इसमें अपार संभावनाएं हैं। यह कहना है एक बांग्लादेशी डिजाइनर बीबी रसेल का जो राजस्थान के शिल्प का पूरी दुनिया में प्रसार करने के लिए यहां के कारीगरों के साथ काम करती हैं।
नई दिल्ली, 20 नवंबर (आईएएनएस)। बांग्लादेशी फैशन के लिए यूरोप एक बड़ा बाजार है, लेकिन भारत के लिए इसमें अपार संभावनाएं हैं। यह कहना है एक बांग्लादेशी डिजाइनर बीबी रसेल का जो राजस्थान के शिल्प का पूरी दुनिया में प्रसार करने के लिए यहां के कारीगरों के साथ काम करती हैं।
रसेल ने यहां आईएएनएस को कहा, “यूरोप हमारा बड़ा बाजार है, लेकिन अगर भारतीय डिजाइनरों और शिल्पकारों को बांग्लादेश में मौका दिया जाए तो हमें यूरोप की ओर मुंह नहीं ताकना पड़ेगा। डिजाइनों की अदला-बदली भारत और बांग्लादेश के लिए कई द्वार खोल देगा।”
पूर्व मॉडल रसेल अगले महीने की शुरुआत में होने वाले ‘राजस्थान हेरिटेज वीक’ में शामिल होंगी। तीन दिसम्बर से शुरू होने वाले इस तीन दिवसीय समारोह में आधुनिक विलासिता और विरासत की खूबसूरती दर्शाई जाएगी।
शिल्प को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत रसेल ने कहा, “मैं राजस्थान में काम करती रही हूं और मैं इससे प्रेरित हूं। मुझे राजस्थान सरकार ने आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है क्योंकि मैं कारीगरों के लिए स्थायी आय सुनिश्चित करने के लिए ही काम कर रही हूं।”
राजस्थान हेरिटेज वीक में अन्य नामचीन डिजाइनरों का काम भी प्रदर्शित किया जाएगा।
इसके लिए डिजाइनर ने सर्दियों के लिए खादी को नए रूप में पेश किया है, जिसके डिजाइन राजस्थान के टेक्सटाइल से प्रेरित हैं।
रसेल ने कहा, “सर्दियों को देखते हुए मैं बिल्कुल अलग कलेक्शन पेश कर रही हूं।”
डिजाइनर को अपने उत्कृष्ट काम के लिए कई पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है, जिनमें 1999 में लंदन इंस्टीट्यूट की होनोरेरी फेलोशिप, 1999 में यूनेस्को द्वारा दी गई ‘डिजाइनर फॉर डेवलपमेंट’ उपाधि और स्पेन के युनाइटेड नेशन्स एसोसिएशन का 2004 शांति पुरस्कार शामिल है।
राजस्थान हेरिटेज वीक का मुख्य उद्देश्य डिजाइनरों और बुनकरों को सम्मिलित करना है, ताकि खादी व कोटा के प्रसार के साथ ही शिल्पकारों और बनुकरों का उत्थान किया जा सके।
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