नई दिल्ली, 10 मार्च (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल (कैबिनेट) ने गुरुवार को प्रमुख बंदरगाहों में दुबई पोर्ट वल्र्ड लिमिटेड (डीपीडब्ल्यू) की कंटेनर टर्मिनल परियोजनाओं की शेयरधारिता में प्रस्तावित परिवर्तन पर अनापत्ति दिए जाने को अपनी मंजूरी देकर डीपीडब्ल्यू को भारतीय होल्डिंग कंपनी बनाने की मंजूरी दे दी। यह जानकारी यहां जारी एक आधिकारिक बयान में दी गई।
कैबिनेट ने प्रमुख बंदरगाहों पर टर्मिनल परिचालनों के संचालन एवं प्रबंधन के लिए विशिष्ट परिसंपत्ति पोर्टफोलियो के साथ डीपीडब्ल्यू की एक भारतीय होल्डिंग कंपनी बनाने की अनुमति दे दी है।
बयान के मुताबिक, इस कदम से बंदरगाह क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा मिलेगा।
डीपीडब्ल्यू लिमिटेड देश में अपनी परिसंपत्तियों के पुनर्गठन पर विचार कर रही है, जिसका उद्देश्य बंदरगाह संबंधी बुनियादी ढांचे के स्वामित्व को एकल होल्डिंग कंपनी हिन्दुस्तान पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (एचपीपीएल) में समेकित करना है।
नई कंपनी रियायती समझौतों के संबंध में डीपी वर्ल्ड की मौजूदा सहायक कंपनियों की सभी देनदारियों का जिम्मा संभालेगी। इसके तहत अंतिम लाभार्थी और अंतिम वैधानिक एवं लाभप्रद स्वामित्व में कोई परिवर्तन नहीं होगा, जो आगे भी मेसर्स डी.पी.वर्ल्ड के पास बरकरार रहेगा।
उल्लेखनीय है कि एफआईपीबी ने डी.पी.वर्ल्ड को अपनी मंजूरी दे दी है। डीपीडब्ल्यू के प्रस्ताव का उद्देश्य पूंजीगत आधार बढ़ाने में उनकी मदद करना और देश में बंदरगाहों एवं लॉजिस्टिक्स से जुड़े बुनियादी ढांचे में नया निवेश सुनिश्चित करना है। इससे वित्त की सक्षम पहुंच के साथ-साथ बंदरगाह परिचालन में नवीनतम प्रौद्योगिकी को समाहित करना संभव हो पाएगा।
सरकार ने डीपीडब्ल्यू द्वारा पुनर्गठन किए जाने के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है। इसके साथ इस शर्त का पालन करना होगा कि संबंधित परियोजना से जुड़े एसपीवी (विशेष उद्देश्य वाहन) के शेयरों के अधिग्रहण के बाद होल्डिंग कंपनी एचपीपीएल का मूल्य 8 करोड़ डॉलर से ज्यादा रहेगा।
डीपीडब्ल्यू के समेकन प्रस्ताव को मंजूरी से देश में एफडीआई को बढ़ावा देने में भी आसानी होगी और इसके साथ ही बंदरगाह क्षेत्र में निवेशक अनुकूल माहौल का भी संकेत मिलेगा।
dharmpath.com dharmpath