न्यूयॉर्क, 5 अगस्त (आईएएनएस)। अपने प्रायद्वीपीय-जीवन और वार्षिक प्रवास में दिक्कतों की वजह से प्रवासी पक्षियों को तनाव का सामना करना पड़ रहा है। एक अध्ययन में सामने आया है कि तनाव की वजह से प्रवासी पक्षियों की उम्र तेजी से बढ़ रही है और वे असमय मौत का शिकार भी हो रहे हैं।
प्रवास से पक्षियों को खाने की प्रचुर मात्रा और प्रजनन की अनुकूलना और कड़ी ठंड वाले इलाकों से राहत मिल जाती है।
शोधकर्ता कहते हैं कि इन फायदों के बदले प्रवासी पक्षियों को बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।
निष्कर्षो में कहा गया है कि टीलोमीयर्स -गुणसूत्रों के अंतिम बिंदुओं पर बनी संरचनाएं उम्र के साथ कम होती जाती हैं।
शोधकर्ताओं के दल ने काली आंख वाले जंको प्रवासी पक्षी की तुलना उसी जाति के स्थानीय पक्षी के टीलोमीयर्स से तुलना की है।
उन्होंने पाया कि प्रवासी पक्षियों में टीलोमीयर्स वहां साल भर रहने वाले पक्षियों की तुलना में विशेष तौर पर छोटे थे। दल ने सुझाया कि प्रवासी जीवन और तनाव की वजह से प्रवासी पक्षियों में उम्र तेजी से बढ़ रही है। इससे उनका जीवनचक्र भी घट रहा है।
उत्तरी डाकोटा स्टेट विश्वविद्यालय के कैरोलिन बाइर ने कहा, “जब कभी हमारी कोशिकाएं विभाजित होती हैं, हम अपने डीएनए का छोटा भाग खो देते हैं जो हमारे गुणसूत्र के अंतबिंदु पर होते हैं, टीलोमीयर्स साधरणतया नान-कोडिंग भाग होते हैं और वे सुरक्षा टोपी की तरह कार्य करते हैं।”
बाइर ने कहा, “एक बार वह एक निश्चित सीमा तक छोटे हो जाने के बाद कोशिकाएं मरने लगती हैं। तनाव के जोखिम भी टीलोमीयर्स को छोटा कर देते हैं।”
यह अध्ययन रिपोर्ट पत्रिका ‘द औक : ओरिंथोलॉजिकल एडवांसेंज’ में प्रकाशित हुई है। दल ने वर्जिनिया के 11 प्रवासी और 21 निवासी जंको के रक्त नमूनों को जुटाकर अध्ययन किया। इसमें उम्र के अंतर से परहेज रखने के लिए सिर्फ पहले साल के पक्षियों के टीलोमीयर्स को जांचा गया।
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