तमिलनाडु में लघु, मझौले उद्योग संकट में

चेन्नई, 9 जून (आईएएनएस)। तमिलनाडु में हजारों की संख्या में लघु और मझौले उद्योग वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के लागू होने समेत विभिन्न कारणों से बंद होने के कगार पर पहुंच गए हैं। इसके कारण हजारों लोगों पर बेरोजगारी का खतरा मंडराने लगा है।

राज्य सरकार की तरफ से जारी आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 के दौरान सूक्ष्म, लघु एवं मझौले उद्योगों (एमएसएमई) की संख्या में 48,329 की कमी आई है। जबकि इस दौरान क्षेत्र में 5,19,075 लोगों को अपनी नौकरियां गंवानी पड़ी हैं।

तमिलनाडु विधानसभा के पटल पर रखे गए पॉलिसी नोट 2018-19 के मुताबिक, 2016-17 में राज्य में पंजीकृत एमएसएमई इकाइयों की संख्या पिछले वित्त वर्ष की 2,67,310 इकाइयों से घटकर 2,17,981 हो गई हैं।

एमएसएमई क्षेत्र में कार्यरत लोगों की संख्या जहां 2016-17 में 18,97,619 थी, वह 2017-18 में घटकर 13,78,544 रह गई है।

एमएसएमई क्षेत्र में निवेश भी 2017-18 में 25,373.12 करोड़ रुपये रहा, जबकि 2016-17 में यह 36,221.78 करोड़ रुपये रहा था।

तमिलनाडु के एमएसएमई क्षेत्र में इस कदर गिरावट कभी नहीं देखी गई।

पॉलिसी नोट के मुताबिक, 31 मार्च, 2015 को वैश्विक निवेशकों की बैठक में राज्य सरकार के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर करने वाले 10,073 एमएसएमई में से 5,358 उद्यमों ने 6,352.03 करोड़ रुपये के निवेश के साथ उत्पादन शुरू किया था।

उद्योग के अधिकारियों ने इसके लिए कारोबारियों द्वारा भुगतान में देरी, जीएसटी से जुड़े मुद्दों, ऑर्डर की कमी और बैंकों व अन्यों द्वारा कन्नी काटने जैसे कारणों को जिम्मेदार ठहराया है।

इसके अतिरिक्त राज्य में औद्योगिक निवेश के लिए माहौल अनुकूल नहीं है, जिसके कारण हाल ही में बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं ने आंध्र प्रदेश की ओर रुख किया है।

तमिलनाडु स्मॉल एंड टिनी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (तन्स्तिया) के पूर्व अध्यक्ष व ट्रांस गियर्स के प्रबंध साझेदार के. गोपालकृष्णन ने आईएएनएस को बताया, “बड़े कारोबारियों द्वारा आपूर्ति किए गए सामानों के भुगतान में देरी एमएसएमई क्षेत्र के सामने एक प्रमुख मुद्दा है। इसके अलावा ऑर्डर में कमी, जीएसटी से जुड़ी प्रक्रियाएं एमएसएमई इकाइयों के सामने खड़ी प्रमुख बाधाओं में से हैं।”

उन्होंने कहा कि रियल एस्टेट के दाम बढ़कर एक स्तर तक पहुंच गए हैं, जिसके कारण उद्यमियों को उनके निवेश के सही दाम नहीं मिल पा रहे हैं।

गोपालकृष्णन ने कहा, “इनमें से एक बड़ी समस्या बैंकरों का रवैया है। गैर-निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) के भार के कारण बैंकर एमएसएमई इकाइयों को ऋण देने से परहेज कर रहे हैं। इसके अलावा, वे ऋण के लिए जमानत की मांग करते हैं, भले ही योजनाएं उस पर जोर न देती हों।”

राज्य में 49,329 इकाइयों के बंद होने को अन्नाद्रमुक सरकार की एक बड़ी उपलब्धि करार देते हुए पीएमके संस्थापक एस. रामदॉस ने कहा कि पिछले एक वित्त वर्ष में एमएसएमई क्षेत्र में गिरावट और नौकरियों की संख्या में कमी एक बहुत ही गंभीर मुद्दा है और इसे अलग नहीं किया जा सकता।

रामदॉस ने कहा, “पिछले 12 सालों के दौरान क्षेत्र में इतने बड़े पैमाने पर एमएसएमई इकाइयों को बंद होते हुए नहीं देखा गया है।”

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