काबुल, 18 मार्च (आईएएनएस)। असंतुष्ट तालिबान नेता मुल्ला रसूल ने कहा है कि वह अफगानिस्तान सरकार के साथ शांति वार्ता में हिस्सा नहीं लेगा। बैठक में तालिबान का नेतृत्व मुल्ला अख्तर मंसूर कर रहा है।
खामा प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रसूल ने कहा कि वह सैद्धांतिक रूप से सुलह का विरोधी नहीं है। उसने जोर दिया कि जहां तक तालिबान की बात है, तो वे शांति प्रक्रिया में मंसूर के वर्चस्व का विरोध करते हैं।
रसूल ने कहा, “पहले हम यह सोचते थे कि अफगानिस्तान सरकार सभी तालिबान के साथ शांति चाहती है, लेकिन हमने देखा कि पाकिस्तान सरकार के आदेश के मुताबिक वे केवल मुल्ला मंसूर के साथ शांति वार्ता में दिलचस्पी रखते हैं। हमने शांति वार्ता में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है।”
रसूल ने कहा कि वह शांति बैठक में मंसूर के साथ नहीं बैठ सकता, जिसका नेतृत्व नकली माना जाता है और जो अकेले अमन नहीं लाएगा।
उन्होंने कहा कि वह तभी बातचीत करेंगे, जब मंसूर को इस शांति वार्ता से अलग किया जाता है।
इस बीच, रसूल ने सुलह प्रक्रिया में ईरान को शामिल करने का पक्ष लेते हुए कहा कि चार पक्षों (तालिबान के साथ सुलह वार्ता फिर शुरू करने के लिए अमेरिका, चीन, पाकिस्तान व अफगानिस्तान के राजनयिकों का प्रयास) का दृष्टिकोण क्षेत्रीय हितों की विभिन्नता का प्रतिनिधित्व करने के लिए पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि उनके विचार से ईरान को सुलह प्रक्रिया से बाहर करने से सुलह का प्रयास सफल नहीं होगा।
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