अंकारा, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। चुनाव निगरानी समूह काउंसिल ऑफ यूरोप (सीओई) ने मंगलवार को कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति द्वारा कराए गए जनमत संग्रह के दौरान 25 लाख वोटों की हेरफेर हो सकती है और यह संख्या नतीजों को पलटने की क्षमता रखती है।
ऑर्गनाइजेशन फॉर सिक्योरिटी एंड कोऑपरेशन इन यूरोप (ओएससीई) सहित कई संस्थानों ने कहा है कि राष्ट्रपति की शक्तियों में विस्तार को लेकर रविवार को कराया गया जनमत संग्रह लोकतांत्रिक मानदंडों पर खरा नहीं उतरता।
निगरानी समूह (सीओई) में शामिल ऑस्ट्रियाई राजनीतिज्ञ अलेव कोरून ने कहा, “शक जताया जा रहा है कि लगभग 25 लाख वोटों की हेराफेरी की गई।”
तुर्की की मुख्य विपक्षी रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी ने कहा कि वह जनमत संग्रह को रद्द करने का औपचारिक तौर पर आग्रह करती है।
पार्टी पहले ही उन 25 लाख मतपत्रों की निष्पक्ष तरीके से दोबारा मतगणना की मांग कर चुकी है, जिनपर मुहर न होने के बावजूद उन्हें सुप्रीम इलेक्टोरल काउंसिल ने स्वीकार किया था।
25 लाख वोटों की पुनर्मतगणना की आधिकारिक चुनौती से ‘येस’ कैंप को झटका लग सकता है, जिसने ‘नो’ कैंप पर 12.5 लाख मतों के मामूली अंतर से जीत दर्ज की है।
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तईप एर्दोगन पहले ही जीत का दावा कर चुके हैं और जीत को लेकर बाद में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शुभकामना भी स्वीकार कर चुके हैं।
कोरून ने कहा कि उन्होंने मतदान प्रक्रिया में खुद कोई अनियमितता नहीं देखी, लेकिन उनके दो साथियों को देश के अशांत दक्षिणपूर्व इलाके में स्थित कुर्द बहुल शहर दियारबाकिर में मतदान केंद्रों में घुसने से रोका गया।
येस कैंप ने 51.4 फीसदी मत मिलने का दावा किया है। इस जनमत संग्रह का उद्देश्य संविधान की तमाम शासकीय शक्तियों को राष्ट्रपति के हाथ सौंपना तथा प्रधानमंत्री के पद को खत्म करना है।
लेकिन जिस माहौल में मतदान हुए हैं, उस पर कई अधिकारियों ने चिंता जताई है।
जनमत संग्रह के लिए ओएससीई के अध्यक्ष ताना दे जुलुएता ने सोमवार को कहा कि रविवार को हुए मतदान में निष्पक्षता की कमी रही, क्योंकि येस कैंप को मीडिया में अधिक से अधिक कवरेज का मौका दिया गया, जबकि दूसरे पक्ष को रोका गया और कई पत्रकारों को गिरफ्तार कर लिया गया।
यूरोप की कई सरकारों ने एर्दोगन से यह साबित करने को कहा है कि मतदान निष्पक्ष तरीके से कराया गया, साथ ही उन्हें अंतर्राष्ट्रीय प्रेक्षकों से पूर्ण सहयोग करने को कहा गया।
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, 99.97 फीसदी मतपत्रों की गणना की गई, जिनमें अभियान के प्रति 51.41 फीसदी लोगों ने ‘हां’ के रूप में अपना जवाब दिया, जबकि 48.59 फीसदी लोगों ने ‘नहीं’ में जवाब दिया, जिसके बाद निर्वाचन समिति ने विजय की घोषणा की। जनमत संग्रह के अंतिम नतीजे 11-12 दिनों के भीतर जारी कर दिए जाएंगे।
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