उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर-मस्जिद की राजनीति में स्वयं भी उलझे हुए हैं और उन्होंने प्रदेश की जनता को भी उलझा रखा है।
डॉ. अहमद ने कहा कि प्रदेश में सिर्फ भाषणों के माध्यम से महिला सशक्तिकरण और ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ की चर्चाएं की जाती हैं, लेकिन समूचे प्रदेश में महिलाओं और बेटियों पर अत्याचार और अनाचार की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं।
उन्होंने कहा कि अपराधों का ग्राफ लगातार बढ़ रहा है, जबकि मुख्यमंत्री अपराधियों का स्थान जेल बता रहे हैं। ऐसी स्थिति में यह विषय विचारणीय है कि यदि अपराधी जेल में हैं, तो जगह-जगह होने वाले जघन्य एवं क्रूरतम अपराध क्या भगवाधारी लोग कर रहे हैं और इसी कारणवश प्रदेश की पुलिस उन पर लगाम नहीं लगा पा रही है।
डॉ. अहमद ने कहा कि प्रदेश के दूर-दराज के गांवों में चोरी-डकैतियां लगातार बढ़ रही हैं, किसान और मजदूर दिनभर मेहनत करके रात में सो जाता है और आंख खुलने के बाद उसके घर का सामान लुटा नजर आता है। कमोवेश यही हालात सब तरफ हैं।
उन्होंने सवाल उठाया, “क्या गरीब का पेट मंदिर-मस्जिद की राजनीति से भरेगा और प्रदेश की शांति व्यवस्था लोगों के दिलों के बंटवारे से ठीक होगी?”
रालोद प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि जनता ने अमन-चैन और खुशहाली के लिए भारी बहुमत से भाजपा की सरकार बनाई थी, लेकिन जितनी जल्दी यह सरकार जनता की नजरों से उतर गई है, इतनी जल्दी अब तक कोई सरकार नहीं उतरी थी।
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