अगरतला, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। सरकारी स्कूलों के बड़ी संख्या में बर्खास्त शिक्षकों ने मंगलवार को अपनी सेवा जारी रखने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया।
शिक्षा निदेशक को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने के बाद विरोध प्रदर्शन की अगुवाई करने वाले बिमल साहा ने मीडिया से कहा, “शिक्षक गुरुवार को ड्यूटी से अलग रहेंगे।”
इसका मतलब है कि शिक्षक स्कूल जाएंगे, लेकिन पढ़ाएंगे नहीं।
सर्वोच्च न्यायालय ने 29 मार्च 2017 को त्रिपुरा उच्च न्यायालय के 10,323 सरकारी शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने के फैसले को कायम रखा। अदालत ने यह फैसला वाम मोर्चे के शासन के दौरान माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में इन शिक्षकों को अविवेकपूर्ण आधार पर चयनित किए जाने को लेकर दिया।
अपील के बाद शीर्ष अदालत ने शिक्षकों की सेवाओं को इस साल जून तक विस्तार दे दिया।
शिक्षा व कानून मंत्री रतनलाल नाथ ने मीडिया से कहा, “भाजपा सरकार ने जून में सेवाओं के दो साल और विस्तार के लिए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष स्पेशल लीव पिटीशन (एसएलपी) जमा की है।”
उन्होंने कहा कि अगर उनकी सेवाओं को विस्तार नहीं दिया गया तो 4,928 सरकारी स्कूलों के लाखों छात्र उचित शिक्षा प्राप्त करने से वंचित हो जाएंगे।
इस बीच राज्य के कानून विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में तीन न्यायाधीशों की पीठ गुरुवार को शिक्षकों के मामले की सुनवाई करेगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार के पास 12,222 खाली पद हैं। इन पदों को नहीं भरा जा सकता है क्योंकि प्रोफेशनल डिग्री वाले योग्य शिक्षकों की भारी कमी है।
उन्होंने कहा कि राज्य में प्रोफेशनल डिग्री प्रदान करने वाले सिर्फ छह बी.एड कॉलेज हैं।
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