अगरतला, 4 सितम्बर (आईएएनएस)। त्रिपुरा उच्च न्यायालय ने सरकारी और निजी शिक्षकों के ट्यूशन पढ़ाने पर रोक लगा दी है। अभिभावकों ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
मुख्य न्यायाधीश दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति उत्पलेंदु बिकाश साहा ने गुरुवार को अपने फैसले में कहा कि सरकारी शिक्षकों के साथ-साथ निजी विद्यालयों के शिक्षक भी अपने विद्यालय के विद्यार्थियों को ट्यूशन नहीं दे सकेंगे।
फैसले में हालांकि कहा गया है कि निजी विद्यालयों के शिक्षक दूसरे विद्यालयों के बच्चों को ट्यूशन पढ़ा सकेंगे।
अभिभावकों के एक हिस्से ने इस फैसले के खिलाफ कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
राज्य के स्कूली शिक्षा विभाग के एक अधिकारी ने बताया, “मई में उच्च न्यायालय ने सरकारी, अर्ध सरकारी, निजी विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा ट्यूशन पढ़ाने के मामले का स्वत: संज्ञान लिया था। लंबी सुनवाई और सरकार के विचार जानने के बाद उच्च न्यायालय ने राज्य में निजी ट्यूशन पर लगभग पूरी तरह से रोक लगा दी।”
राज्य के स्कूल एवं उच्च शिक्षा मंत्री तपन चक्रबर्ती ने बताया कि राज्य सरकार ने 2011 में ही सरकारी विद्यालयों के शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन लेने पर रोक लगा दी थी।
चक्रबर्ती ने कहा, “रोक के बावजूद बड़ी संख्या में शिक्षकों ने सरकारी आदेश का पालन नहीं किया। अभिभावकों में भी ऐसे लोग कम नहीं थे जिन्होंने सरकारी शिक्षकों पर ट्यूशन लेने का दबाव डाला। राज्य सरकार उच्च न्यायालय के फैसले का समर्थन करती है।”
उच्च न्यायालय ने जब इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया उसके बाद राज्य सरकार ने कई सरकारी शिक्षकों को निजी तौर से ट्यूशन पढ़ाने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया।
ट्यूशन पर रोक के फैसले के खिलाफ छात्रों और अभिभावकों ने धरने-प्रदर्शन किए हैं। उन्होंने सरकारी अधिकारियों के सामने भी अपनी बात रखी है।
हाल ही में बने अभिभावक मंच के संयोजक मृत्युंजय देब ने कहा कि निजी ट्यूशन को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “पूरे देश की शिक्षा व्यवस्था निजी ट्यूशन पर निर्भर है। ऐसे में त्रिपुरा में इस पर रोक कैसे लग सकती है।”
देब ने कहा कि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के छात्र विभिन्न तरह की प्रवेश परीक्षाओं में कड़ी प्रतियोगिता से गुजरते हैं। अगर इन्हें अतिरिक्त कोचिंग नहीं मिलेगी तो इनके लिए इस तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं को पास करना मुश्किल हो जाएगा।
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