राष्ट्रीय पार्क, वन्यजीव एवं पौधा संरक्षण (डीएनपी) विभाग के थाई वन्यजीव अधिकारियों ने कंचनबरी प्रांत के लोकप्रिय पर्यटन स्थल से नौ बाघों के आखिरी जत्थे को राचाबरी प्रांत के प्रजनन केंद्र भेज दिया। यहां से ले जाया गया आखिरी बाघ नर था और इसका नाम सायफा था, जिसका वजन 300 किलोग्राम था।
डीएनपी के वन्यजीव पशु चिकित्सक पैत्रापॉल मानीरन ने शुक्रवार को कहा कि आखिरी जत्थे में बाघों की आयु लगभग आठ से 12 वर्ष थी।
डीएनपी के मुताबिक, राचाबरी के दो प्रजनन केंद्रो में अब सभी 137 बाघ हैं। इनमें से इंडोचाइनीज बाघों एवं उससे संबंधित प्रजातियों के बाघों को बाद में प्रकृति की गोद में छोड़ दिया जाएगा, जबकि बंगाल टाइगर यहीं रहेंगे।
मंदिर में रह रहे अन्य जानवरों में मोर, हिरण और जंगली भालू हैं। इन्हें बाद में स्थानांतरित किया जाएगा लेकिन इसमें अधिक समय लगेगा।
अधिकारियों को सोमवार से मारे गए छापे में इस विवादित बौद्ध मंदिर से बाघों, भालूओं और अन्य जानवरों के शवों से बने सामान मिले।
थाईलैंड के अधिकारियों ने गुरुवार को एक ट्रक के अंदर से दो बाघों की खाल बरामद की। ट्रक विवादित बौद्ध मंदिर से बाहर जाने की कोशिश कर रहा था। यह बौद्ध मंदिर पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बाघों का इस्तेमाल करता रहा है।
खालों की बरामदगी के अलावा राष्ट्रीय उद्यान संरक्षण विभाग (एनपीसीडी) के सदस्य सोमवार से ही मंदिर की भी जांच कर रहे हैं। उन्होंने सैकड़ों ताबीज बरामद किए हैं जिनमें कहा जा रहा है कि बाघों की हड्डियों एवं दांत के अवशेष मिले हैं।
अधिकारियों ने बुधवार को एक फ्रीजर से बाघ के 40 शावकों के शव बरामद किए थे।
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