तेहरान, 5 जून (आईएएनएस)। ईरान ने आतंकवाद पर अमेरिका की वार्षिक रिपोर्ट को हास्यास्पद और झूठा करार दिया है।
इस रिपोर्ट में ईरान को वैश्विक आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजकों में से एक बताया गया है।
एफे न्यूज की खबर के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक बयान में कहा है कि रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान और सीरिया दोनों ने अपने आतंकी रिश्ते बढ़ा लिए हैं। इन दोनों देशों का नाम अमेरिकी रिपोर्ट में वर्ष 1984 से ही आ रहा है।
मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन जाबेरी अंसारी ने इस रिपोर्ट का जवाब देते हुए कहा, “आतंकवाद पर अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट अमेरिका द्वारा ईरान पर आतंकवाद को समर्थन देने के झूठे आरोपों की वजह से विश्वसनीयता के अभाव वाले सबसे अच्छे दस्तावेज में बदल गई है।”
जाबेरी ने कहा कि जो देश दूसरे के कब्जे में है, उन देशों का आजादी और स्वतंत्रतता के लिए संघर्ष आतंकवाद नहीं है।
उन्होंने कहा कि रिपोर्ट के वे हिस्से जो इस तरह के संघर्ष पर आधारित हैं, वे खारिज कर दिए गए क्योंकि वे यहूदी शासन को सबसे बड़े कब्जा करने वाले, आतंकवाद, मानवाधिकारों के उल्लंघन और जनसंहार आधारित नीतियां लागू करने वाले, दमन और फिलिस्तीन राष्ट्र के वजूद से इनकार को प्रतिबिंबित करते हैं।
बयान में कहा गया है, “अमेरिका यहूदी शासन को बिना शर्त समर्थन देकर राज्य प्रायोजित आतंकवाद का सबसे बड़ा समर्थक बन चुका है.. और अब व्यावहारिक रूप से चरमपंथ और आतंकवाद का समर्थन कर रहा है, साथ ही सऊदी अरब एवं उसके अन्य सहयोगियों द्वारा बड़े पैमाने पर वित्तीय एवं राजनीतिक समर्थन देकर इस घृणित चीज को पूरी दुनिया में फैलाता देखकर भी उसकी अनदेखी कर रहा है।”
अमेरिकी रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान ने वर्ष 2015 के दौरान लेबनानी शिया इस्लामी गुट हिजबुल्ला, गाजा में फिलिस्तीनी आतंकी गुट और इराक में कई अन्य गुटों एवं मध्य-पूर्व के देशों में आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियों को समर्थन देना जारी रखा।
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