बसपा प्रमुख मायावती को अपशब्द कहने के बाद भाजपा ने बुधवार को दयाशंकर को पार्टी से निकाल दिया। बुधवार रात ही लखनऊ के हजरतगंज थाने में दयाशंकर पर मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी के प्रयास शुरू हो गए।
दयाशंकर सिंह बुधवार की शाम तक बलिया में ही थे, लिहाजा यहां हलचल और भी तेज हो गई। गुरुवार की सुबह सीओ सिटी के.सी. सिंह के नेतृत्व में पुलिस दयाशंकर सिंह के आवास पर आ धमकी लेकिन दयाशंकर वहां नहीं मिले।
उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ है। आवास पर मौजूद उनके भाई ने बताया कि दयाशंकर सिंह भोर में ही गोरखपुर चले गए। पुसिल ने उनके भाई को हिरासत में ले लिया है।
बताया गया है कि दयाशंकर के खिलाफ 153ए, 504, 509 और एससी-एसटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। दयाशंकर के खिलाफ जिन धाराओं में मामला दर्ज हुआ है, उनमें सात साल से कम की सजा का प्रावधान है।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुसार सात साल से कम की सजा पर पुलिस आमतौर से आरोपी को गिरफ्तार नहीं कर सकती है। लेकिन, उसके आदेश में 13 ऐसे बिंदु है, जिनका हवाला देकर गिरफ्तारी की जा सकती है। इसमें एक बिंदु में आरोपी की वजह से कानून एवं व्यवस्था की स्थिति खराब होने की दशा में उसकी गिरफ्तारी का प्रावधान है।
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