दलाई-प्रणब मुलाकात से विश्व को मिला संदेश : सांगे

धर्मशाला, 17 दिसंबर (आईएएनएस)। तिब्बत के निर्वासित प्रधानमंत्री लोबसांग सांगे ने शनिवार को कहा कि दलाई लामा और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बीच एक मुलाकात से तिब्बत में रह रहे तिब्बतियों और दुनिया भर की सरकारों को एक उम्मीद भरा संदेश गया है।

चीन को भारत पर उनकी शर्ते नहीं थोपने की बात कहते हुए सांगे ने कहा, “भारत एक संप्रभु राष्ट्र है और उसके राष्ट्र प्रमुख अपनी इच्छा के अनुरूप किसी से भी मिलने को स्वतंत्र हैं। चीन को भारत पर अपनी शर्ते नहीं थोपनी चाहिए।”

गत 10 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में बच्चों के सम्मेलन के दौरान दलाई लामा और मुखर्जी के बीच बैठक पर चीन द्वारा आपत्ति जाहिर करने के एक दिन बाद सांगे ने प्रतिक्रिया दी।

चीन ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में किसी भी व्यावधान से बचने के लिए नई दिल्ली को बीजिंग के मूल हितों का सम्मान करना चाहिए।

भारत ने चीनी विरोध को ज्यादा तवज्जो न देते हुए शुक्रवार को कहा था कि निर्वासित तिब्बती अध्यात्मिक गुरु जिस कार्यक्रम में शामिल हुए थे, वह गैर राजनीतिक था।

वर्ष 1959 में भागकर भारत आए 14वें दलाई लामा पर चीन तिब्बत में अलगाववादी गतिविधियां चलाने का आरोप लगाता है। हालांकि आध्यात्मिक गुरु का दावा है कि वह तिब्बत के लिए सिर्फ ज्यादा स्वायत्तता चाहते हैं।

दलाई लामा का कार्यालय उत्तरी भारत के इस पहाड़ी क्षेत्र में स्थित है।

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