हैदराबाद, 18 जनवरी (आईएएनएस)। केंद्रीय श्रम राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बंडारू दत्तात्रेय ने सोमवार को कहा कि हैदराबाद विश्वविद्यालय में पांच दलित छात्रों के निलंबन से न तो उनका कोई संबंध है और न ही उनकी भारतीय जनता पार्टी का।
लेकिन, मंत्री ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय को भेजे अपने उस पत्र का बचाव किया, जिसमें उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में ‘राष्ट्र विरोधी’ और ‘समाज विरोधी’ तत्वों की गतिविधियों की जानकारी दी थी।
इन पांच छात्रों में से एक, रोहित वेमुला ने खुदकुशी कर ली है।
दत्तात्रेय, विश्वविद्यालय के कुलपति अप्पा राव और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के दो सदस्यों पर रोहित को आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। उन पर अनुसूचित जाति-जनजाति (उत्पीड़न निवारण) अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।
केंद्रीय मंत्री और कुलपति के साथ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के नेताओं -सुशील कुमार और विष्णु- के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है। मामला साइबराबाद पुलिस कमिश्नरी क्षेत्र के गचिबावली थाने में दर्ज किया गया है।
दत्तात्रेय ने अपने खिलाफ दर्ज मामले पर कुछ भी कहने से मना कर दिया।
दत्तात्रेय ने यहां संवाददाताओं से कहा, “मुझसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद का प्रतिनिधिमंडल मिला था। इसमें शामिल नेताओं का कहना था कि उन्हें राष्ट्र विरोधी और समाज विरोधी तत्वों ने पीटा है। मैंने उनकी यही बात मंत्रालय तक पहुंचा दी। मुझे नहीं मालूम कि इस पर क्या कार्रवाई की गई।”
विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज अध्ययन विभाग के द्वितीय वर्ष के शोध छात्र रोहित वेमुला को रविवार रात शोध छात्रों के छात्रावास में अपने कमरे में छत से लटकता पाया गया था।
रोहित की खुदकुशी के बाद से विश्वविद्यालय में तनाव है। विश्वविद्यालय के छात्रों का आरोप है कि पिछले साल अगस्त में एबीवीपी कार्यकर्ताओं से झड़प के कारण अम्बेडकर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एएसए) से संबद्ध पांच दलित छात्रों को निलंबित कर छात्रावास से निकाला गया था।
विभिन्न छात्र समूहों की संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) ने कहा कि वेमुला निलंबन और निष्कासन के कारण काफी निराश था। उसने एएसए के नीले रंग के बैनर का इस्तेमाल खुदकुशी के फंदे के लिए किया। उसके कमरे से पांच पन्नों का एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें उसने लिखा है कि कैसे वह हमेशा सितारों को देखता था और एक दिन लेखक तथा प्रतिष्ठित शिक्षक बनने का सपना देखता था।
वेमुला अपने साथ निष्कासित हुए चार अन्य छात्रों के साथ पिछले 15 दिनों से विश्वविद्यालय परिसर में विरोध प्रदर्शन कर रहा था। छात्रावास से निष्कासन के विरोध में वे खुले में सो रहे थे।
इन पांचों छात्रों को पिछले साल अगस्त में एबीवीपी के कार्यकर्ताओं से झड़प के बाद निलंबित कर दिया गया था। यह मामला दिल्ली विश्वविद्यालय में ‘मुजफ्फरनगर बाकी है’ वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग पर एबीवीपी के हमले के बाद शुरू हुआ। एएसए ने एबीवीपी के इस कदम की निंदा करते हुए इसके विरोध में परिसर में प्रदर्शन किया था। एबीवीपी के सुशील कुमार ने बाद में ने शिकायत दर्ज कराई था कि एएसयू कार्यकर्ताओं ने उन्हें पीटा है। एएसयू ने इसे गलत बताया था।
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