नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह यह दिशा-निर्देश नहीं बना सकता कि दहेज उत्पीड़न के मामलों की जांच कैसे की जाए क्योंकि ऐसा करना वैधानिक प्रावधानों से परे जाना हो सकता है।
मुख्य न्यायधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए.एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी.वाई चंद्रचूड़ ने यह बात कही और इस बात का संकेत दिया कि यह दो न्यायाधीशों की पीठ द्वारा दिए गए फैसले की समीक्षा करेगा, जिसने पुलिस कार्रवाई से पहले दहेज उत्पीड़न की शिकायतों की जांच के लिए समिति के गठन के निर्देश दिए थे।
न्यायाधीश ए.के. गयोल की अध्यक्षता वाली दो न्यायाधीशों की पीठ ने दहेज उत्पीड़न शिकायतों को निपटाने के संबंध में दिशा-निर्देश दिए थे।
एमिकस क्यूरी वरिष्ठ वकील वी. शेखर और इंदु मल्होत्रा ने फैसले पर रोक लगाने की मांग की है, जिसके तहत दिशानिर्देश तय किए गए थे। न्यायालय ने कहा कि वह “इसे स्वीकार कर सकता है या खारिज कर सकता है।”
दिशा-निर्देश इस मसले पर तय हुए थे कि पुलिस को भारतीय दंड संहिता की धारा 498ए के तहत दहेज उत्पीड़न के मामलों में कैसी कार्रवाई करनी चाहिए।
लेकिन, न्यायालय ने कहा कि दहेज उत्पीड़न मामले में 498ए के वैधानिक प्रावधानों को लागू करने के लिए दिशा-निर्देश की जरूरत नहीं है।
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