नई दिल्ली, 17 सितम्बर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में तेजी से पैर पसारते डेंगू के मामलों के बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र और दिल्ली सरकार से डेंगू की बीमारी पर रिपोर्ट मांगी। अदालत ने पूछा है कि सरकारों ने इस बीमारी पर काबू पाने के लिए क्या उपाय किए हैं।
नई दिल्ली, 17 सितम्बर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय राजधानी में तेजी से पैर पसारते डेंगू के मामलों के बीच दिल्ली उच्च न्यायालय ने गुरुवार को केंद्र और दिल्ली सरकार से डेंगू की बीमारी पर रिपोर्ट मांगी। अदालत ने पूछा है कि सरकारों ने इस बीमारी पर काबू पाने के लिए क्या उपाय किए हैं।
मुख्य न्यायाधीश जी.रोहिणी और न्यायाधीश जयंत नाथ की पीठ ने कहा कि यह एक गंभीर मुद्दा है। अदालत ने मामले में नगर एजेंसियों को भी पक्षकार बनाया है।
अदालत ने केंद्र, दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और नई दिल्ली नगर निगम (एनडीएमसी) को नोटिस जारी किया है। इन्हें 24 सितंबर तक जवाब देने के लिए कहा गया है।
अदालत ने कहा है कि बीमारी से निपटने के लिए अभी तक उठाए गए कदमों की उसे जानकारी दी जाए। दो हफ्ते के अंदर एक संक्षिप्त हलफनामा भी दिया जाए।
दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने अदालत को बताया कि ‘सरकार सक्रिय मुद्रा में’ है और डेंगू मरीजों के इलाज के लिए जरूरी कदम उठा रही है। अस्पतालों में 1000 बेड बढ़ाए गए हैं। निजी अस्पतालों में बेड की संख्या को और बढ़ाया जाना है।
अदालत ने नोटिस विधि की छात्रा गौरी ग्रोवर की जनहित याचिका पर जारी किया। गौरी ने उन अस्पतालों के निदेशकों पर प्राथमिकी दर्ज करने की अपील की है जिन्होंने एक डेंगू पीड़ित बच्चे को दाखिल करने से मना कर दिया था और बच्चे की मौत हो गई थी।
अदालत ने प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश नहीं दिया और याचिकाकर्ता के वकील सत्यरंजन स्वेन से लापरवाही के और सबूत पेश करने को कहा।
दिल्ली में डेंगू से 16 लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन दिल्ली नगर निकाय ने पांच मरीजों की मौत की ही पुष्टि की है। राजधानी में अभी तक डेंगू के कुल 1872 मामले सामने आए हैं।
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