दिल्ली में चुनाव का रास्ता साफ

imagesनई दिल्ली, 3 नवंबर-| भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (आप) के नेताओं ने सोमवार को दिल्ली के उपराज्यपाल नजीब जंग से मुलाकात की और सभी ने राष्ट्रीय राजधानी में नए सिरे से चुनाव कराने का आग्रह किया। इसके साथ ही यहां महीनों से जारी राजनीतिक अनिश्चितता समाप्त हो चली है और चुनाव का रास्ता साफ हो गया है। तीनों दलों के नेताओं ने जंग से कहा कि चूंकि 70 सदस्यीय विधानसभा में कोई भी दल सरकार बनाने की स्थिति में नहीं है, लिहाजा नए सिरे से चुनाव अनिवार्य है।

इसके बाद राजभवन से जारी एक बयान में कहा गया कि जंग अब अपनी सिफारिश राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास भेजेंगे। ज्यादा संभावना है कि वह नए चुनाव की सिफारिश करेंगे।

इसके पहले पिछले वर्ष दिसंबर में हुए चुनाव में त्रिशंकु विधानसभा बनी थी। भाजपा 31 सीटें हासिल कर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी, लेकिन उसने सरकार बनाने से इंकार कर दिया था।

आप 28 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर थी। आप की इस उपलब्धि पर पूरा देश चकित हो गया था। आप ने कांग्रेस के समर्थन से अल्पमत सरकार भी बनाई।

लेकिन यह सरकार 49 दिनों बाद ही चली गई, क्योंकि मुख्यमंत्री और आप संस्थापक अरविंद केजरीवाल ने जन लोकपाल विधेयक पारित न हो पाने पर इस्तीफा दे दिया था।

उसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में केजरीवाल भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी से वाराणसी में चुनाव हार गए। बाद में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देकर उन्होंने गलती की।

भाजपा की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय के नेतृत्व में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल उपराज्यपाल से सोमवार को सबसे पहले मिला।

भाजपा ने हालांकि मुलाकात के बाद कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया, लेकिन भाजपा सूत्रों ने कहा कि पार्टी ने दिल्ली में नए सिरे से चुनाव की इच्छा व्यक्त की है। दिल्ली में फरवरी से ही राष्ट्रपति शासन लागू है।

सूत्रों ने कहा कि भाजपा अगले वर्ष फरवरी में चुनाव चाहती है।

कांग्रेस विधायक हारुन यूसुफ ने भी जंग से कहा कि उनकी पार्टी चाहती है कि दिल्ली विधानसभा भंग कर नए सिरे से चुनाव हो।

यूसुफ ने कहा, “हम (पार्टी अध्यक्ष) सोनिया गांधी और (उपाध्यक्ष) राहुल गांधी के मार्गदर्शन में चुनाव लड़ेंगे और विकास हमारा मुख्य एजेंडा होगा।”

आप ने भी कहा कि वह नए सिरे से चुनाव चाहती है। आप बार-बार भाजपा पर आरोप लगाती रही है कि वह दिल्ली में सरकार बनाने के लिए उसके विधायकों को तोड़ रही है।

जंग से मुलाकात के बाद आप नेता मनीष सिसोदिया ने कहा, “हमारा जो रुख आठ महीने पहले था, वही आज भी है। हम चाहते हैं कि दिल्ली विधानसभा भंग कर दी जाए।”

सिसोदिया ने भाजपा की खिल्ली भी उड़ाई। उन्होंने पूछा, “यदि वे नए सिरे से चुनाव चाहते थे, फिर इन महीनों के दौरान उन्होंने इतना सब भ्रम क्यों बनाए रखा?”

दिसंबर 2013 में पहली बार दिल्ली में त्रिकोणीय लड़ाई हुई थी। कांग्रेस जहां 15 वर्षो से शासन कर रही थी, उसे इस बार चुनाव में सिर्फ आठ सीटें हासिल हुई थीं।

इस वर्ष मई में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा दिल्ली की सातों सीटें जीतने में कामयाब हुई, तो आप हर जगह दूसरे स्थान पर रही और कांग्रेस छह सीटों पर तीसरे तथा एक सीट पर चौथे स्थान पर चली गई।

लेकिन लोकसभा चुनाव के कारण दिल्ली विधानसभा में भाजपा की सदस्य संख्या 31 से घटकर 28 हो गई, क्योंकि उसके तीन विधायक संसद के लिए निर्वाचित हो गए। आप के एक विधायक द्वारा पहले ही बगावत करने के बाद उसके पास 27 विधायक रह गए।

भाजपा के कुछ नेताओं ने हाल के महीनों में कहा था कि वे आप से नाराज कुछ विधायकों की मदद से सरकार बनाने में सक्षम हैं। लेकिन ऐसा कभी संभव नहीं हो पाया। केजरीवाल बार-बार आरोप लगाते रहे कि भाजपा उनके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर रही है। भाजपा इन आरोपों का खंडन करती रही।

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