दिल्ली में प्रदूषण से हड़कंप, स्कूल बंद, घरों में रहने की अपील (राउंडअप)

download-4नई दिल्ली, 6 नवंबर (आईएएनएस)। दिल्ली और आसपास के राष्ट्रीय राजधानी के क्षेत्र (एनसीआर) रविवार को भी दमघोंटू प्रदूषण से जूझते रहे। इन इलाकों को गैस चेंबर जैसी शक्ल दे देने वाली अभूतपूर्व धुंध से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने रविवार को कई कदम उठाने की घोषणा की। प्रदूषण से निपटने और बचने के उपाय के तहत सभी स्कूलों को अगले तीन दिनों तक बंद रखा जाएगा।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली का दम घोटने वाले इस संकट से निपटने के लिए अगले पांच दिनों तक इमारतों के निर्माण और इनमें किसी तरह की तोड़फोड़ या उन्हें ढहाने पर रोक भी लगा दी है। साथ ही डीजल से चलने वाले जेनरेटरों को भी अगले दस दिन तक चलाने से रोक दिया गया है। लेकिन, अस्पताल और अन्य आपातकालीन सेवाएं ऐसे जेनरेटर का इस्तेमाल कर सकेंगी। केजरीवाल ने कहा है कि जेनरेटर से बचने के लिए जो कोई भी विद्युत कनेक्शन मांगेगा, उसे तुरंत कनेक्शन दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली में पर्यावरण के संकट पर आरोप-प्रत्यारोप का खेल नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह समस्या कहीं बड़ी है और इसमें पड़ोसी राज्य भी शामिल हैं जहां कहा जा रहा है कि किसान फसलों के अवशेष, पुआल जला रहे हैं। उन्होंने इस मामले में केंद्र के दखल की मांग की और कहा कि किसानों को ऐसी मदद देनी चाहिए जिससे वे अपनी इस कार्रवाई से दूर रहें।

केजरीवाल ने अपने मंत्रिमंडल की आपातकालीन बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहा, “यह राजनीति को अलग कर (समस्या का) समाधान ढूंढ़ने का समय है।”

आम आदमी पार्टी (आप) नेता ने संवाददाताओं से कहा, “प्रदूषण का स्तर पहले से ही काफी ज्यादा था। हमने विशेषज्ञों से सलाह ली है और हम कुछ आपातकालीन कदम उठा रहे हैं।”

केजरीवाल ने कहा कि दक्षिण दिल्ली के बदरपुर के कोयला आधारित ताप बिजली संयंत्र को भी 10 दिनों के लिए बंद कर दिया जाएगा, जिससे काफी मात्रा में राख उठती है। संयंत्र के भीतर फैली राख पर पानी का छिड़काव किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि शहर की सड़कों पर व्यापक पैमाने पर पानी का छिड़काव किया जाएगा और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अंतर्गत आने वाली सभी 100 फुट चौड़ी सड़कों की 10 नवंबर से वैक्यूम क्लीनिंग शुरू की जाएगी।

राजधानी में 30 अक्टूबर को दिवाली के बाद से प्रदूषण के स्तर में और गिरावट आ गई है।

केजरीवाल ने सूखी पत्तियों को जलाने पर प्रतिबंध को कड़ाई से लागू करने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक एप जारी किया जाएगा, जिस पर इसके उल्लंघन से संबंधित जानकारी दी जा सकेगी। जिन इलाकों में इन्हें जलाया जाएगा, वहां के संबंधित अफसरों पर कार्रवाई होगी।

केजरीवाल ने कहा कि नगर निगम प्रशासन को भी शहर में लैंडफिल साइट में आग पर काबू रखने को कहा गया है।

उन्होंने लोगों से जहां तक संभव हो, घर में ही रहने और वहीं से काम करने की भी अपील की और कहा कि वाहनों को चलाने की सम-विषम प्रणाली (ऑड-इवेन स्कीम) को फिर से शुरू किया जा सकता है।

केजरीवाल ने कहा कि दिल्ली सरकार प्रदूषण से निपटने के लिए कृत्रिम बारिश की संभावनाओं पर विचार कर रही है। लेकिन, इस पर विशेषज्ञों और केंद्र सरकार से सलाह-मशविरे की जरूरत है।

सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट (सीएसई) ने राष्ट्रीय राजधानी में मौजूदा धुंध की भयानक स्थिति से निपटने के लिए दिल्ली सरकार द्वारा घोषित आपात उपायों का रविवार को स्वागत किया।

सीएसई ने दिल्ली सरकार की कार्ययोजना का स्वागत करते हुए प्रदूषण से सतत तरीके से निपटने के लिए आपात उपायों और दीर्घकालिक उपायों के सख्त क्रियान्वयन की मांग की, जिसमें सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना भी शामिल है।

सीएसई कार्यकारी निदेशक (अनुसंधान एवं पैरवी) अनुमिता रॉयचौधुरी ने कहा कि इस आपात स्थिति में आपात कार्रवाई की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि सम-विषम योजना और पार्किं ग से जुड़े उपायों को एक साथ लागू करने की जरूरत है।

सीएसई की ओर से एक बयान में कहा गया है, “वाहन भारी मात्रा में जहरीला उत्सर्जन करते हैं, इसलिए लोगों का अत्यंत जहरीले उत्सर्जन का संपर्क उस समय बहुत जोखिम भरा होता है, जब प्रदूषण सतह के करीब संघनित रहता है।”

बयान में कहा गया है, “वाहनों पर नियंत्रण के उपायों के साथ ही सरकार को सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को मजबूत करने की भी जरूरत है।”

सीएसई ने पंजाब और हरियाणा में पुआल जलाने से उठ रहे धुएं के गुबार से निपटने के लिए अंतर-राज्यीय समन्वय स्थापित करने का भी सुझाव दिया है।

स्वराज इंडिया पार्टी ने दिल्ली में धुंध को पर्यावरणीय आपातकाल बताते हुए दिल्ली और केंद्र सरकार पर प्रदूषण से निपटने में नाकाम रहने का आरोल लगाया।

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा कि चाहे नगर निगम हों, दिल्ली की सरकार हो या केंद्र की, किसी के भी अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी को ठीक से नहीं निभाया है।

पूरी राष्ट्रीय राजधानी के वायुमंडल में पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 के अधिकतम स्तर 500 तक पहुंचने से रविवार को काला घना कोहरा छाया रहा और सुबह में दृश्यता घटकर 200 मीटर रह गई।

विगत कुछ दिनों से वायु की गुणवत्ता खतरनाक स्तरनाक स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में बुधवार को धुआं-धुंध का स्तर पिछले 17 साल में सबसे ज्यदा था।

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