नई दिल्ली, 25 जनवरी (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को अपनी संपूर्णता और संवैधानिक वैधता में दिवाला और दिवालियापन संहिता 2016 (आईबीसी) को बरकरार रखा, जिससे ऑपरेशनल लेनदारों को एक झटका लगा है, जिसमें आपूर्तिकर्ता, ग्राहक और ठेकेदार शामिल हैं।
न्यायमूर्ति रोहिंटन एफ. नरीमन की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने आईबीसी को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर फैसला देते हुए परिचालन लेनदारों को वित्तीय लेनदारों के समान सुविधाएं देने की दलीलों को अस्वीकार कर दिया।
परिचालन लेनदार चाहते थे कि उनके साथ बैंकों और वित्तीय संस्थान जैसे सुरक्षित लेनदारों जैसा व्यवहार किया जाए, जो पहले दिवालिया कानून के तहत कार्यवाही के माध्यम से आने वाले धन पर दावा करते हैं।
फैसले ने संहिता की धारा 29ए को बरकरार रखा, जो एक कंपनी के प्रमोटरों को अपने नियंत्रण को पुन: प्राप्त करने के लिए बोली लगाने से दिवालियापन की
कार्रवाई का सामना करने से रोकती है।
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