डॉ. सिंह ने कहा कि डॉ. कलाम ने कठिन संघर्ष के बीच देश के रक्षा वैज्ञानिक होते हुए राष्ट्रपति के सर्वोच्च पद को भी सुशोभित किया। वह झोपड़ी से जीवन शुरू कर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचे। उनका जीवन सादगी और सच्चाई का पर्याय था। देशवासी उन्हें आम जनता के राष्ट्रपति के रूप में हमेशा सम्मान की दृष्टि से देखते थे। बच्चों और युवाओं में वह काफी लोकप्रिय थे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डॉ. कलाम ने एक शिक्षक के रूप में, एक शोधकर्ता वैज्ञानिक के रूप में और मिसाइल मैन के रूप में देश में अपार लोकप्रियता हासिल की। उनके निधन से देश ने अपना एक अनमोल रत्न हमेशा के लिए खो दिया है।
डॉ. सिंह ने कहा कि छत्तीसगढ़ से डॉ. कलाम का गहरा भावनात्मक संबंध था। नए राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ की तरक्की उन्हें काफी प्रभावित करती थी।
राष्ट्रपति के रूप में डॉ. कलाम ने 28 जनवरी, 2004 को रायपुर में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के दसवें दीक्षांत समारोह में अपना प्रेरणादायक उद्बोधन दिया था। उन्होंने तीन जून, 2004 को बस्तर जिले के सरगीपाल का दौरा किया था।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजधानी रायपुर से लगे हुए नया रायपुर में छत्तीसगढ़ की कला संस्कृति पर आधारित पुरखौती मुक्तांगन हमेशा डॉ. कलाम की याद दिलाता रहेगा।
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