न्यूयॉर्क, 21 मई (आईएएनएस)। धरती पर करीब 10 खरब प्रजातियां हो सकती हैं, जिनमें 99.999 फीसदी का अभी पता लगाया जाना बाकी है। यह बात अब तक के सूक्ष्मजीव आंकड़ों के सबसे बड़े विश्लेषण के आधार पर एक अध्ययन में कही गई है।
अध्ययन में कहा गया है कि अब तक जिन प्रजातियों की पहचान हुई है, उनमें से यह मात्र 1/1000 फीसदी है।
इस अध्ययन के लेखकों में से एक ब्लूमिंगटन स्थित इंडियाना विश्वविद्यालय के जय लेलन ने कहा, “धरती पर कितनी प्रजातियां हैं, इसका आकलन करना जीव विज्ञान की बड़ी चुनौतियों में शामिल है।”
वैज्ञानिकों ने सरकारी, अकादमिक एवं नागरिक वैज्ञानिक स्रोतों के सूक्ष्मजीव, पौधों और जानवरों के आंकड़ों को जब जोड़ा तो वह अपनी तरह का सबसे बड़ा संग्रह बन गया।
अंटार्कटिका को छोड़कर दुनिया के समुद्री एवं महादेशों के विभिन्न 35 हजार स्थानों से जुटाया गया यह आंकड़ा 56 लाख अतिसूक्ष्म एवं गैर अति सूक्ष्म प्रजातियों का है।
लेनन कहते हैं, “जैव विविधिता का संबंध किस तरह बहुलता से है, इसे हमारा अध्ययन पर्यावरणीय मॉडलों एवं नए पर्यावरणीय नियमों के साथ सबसे बड़ा आंकड़ा समुच्चय(डाटा सेट) दर्शाता है। धरती पर सूक्ष्मजीवों की कितनी प्रजातियां हैं, इसका यह अध्ययन हमें एक नया एवं सही अनुमान देता है।”
यह आकलन बड़े आंकड़ा समुच्चय पर लागू वैश्विक प्रवर्धन नियमों पर आधारित है। यह प्रोसिडिंग्स ऑफ नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित हुआ है।
रपट के लेखक अमेरिका के ब्लूमिंगटन स्थित इंडियाना विश्वविद्यालय के जय लेनन एवं केनिथ लोसे हैं।
लेनन कहते हैं, “हाल तक प्राकृतिक माहौल में कितनी सूक्ष्म प्रजातियां हैं, इसका सही ढंग से आकलन का हमारे पास साधन का अभाव था। एक नया अनुवांशिक अनुक्रमण तकनीक नई सूचनाओं का एक नया पूल मुहैया करता है।”
बैक्टीरिया और आदि जीवाणु के साथ-साथ फफूंद सहित बहुत सारी सूक्ष्म प्रजातियां इतनी छोटी हैं, जिन्हें खुली आंखों से नहीं देखा जा सकता है।
अध्ययन परिणाम यह भी कहता है कि धरती पर मौजूद हर सूक्ष्म जीव की पहचान भी एक बड़ी चुनौती है।
लेनन ने कहा कि प्रजातियों की जो सूची है, उनमें से केवल 10 हजार को ही कभी प्रयोगशालाओं में विकसित किया गया है। ऐसी प्रजातियों की संख्या एक लाख से भी कम है, जिन्हें आनुवांशिक क्रम के तहत श्रेणीबद्ध किया गया है।
वह कहते हैं, “हमारे परिणाम दर्शाते हैं कि लाख गुना और सूक्ष्म जीव हैं, जिनकी खोज अभी होनी हैं और करीब 10 करोड़ ऐसे हैं, जिन्हें पूरी तरह से पता लगाना है।”
लेनन कहते हैं कि ऐसा लगता है कि सूक्ष्म जीवों की जैव विविधता हमारी कल्पना से भी ज्यादा है।
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