बेंगलुरू, 12 अप्रैल (आईएएनएस)। निर्माणाधीन नई उड्डयन नीति में देश के अधिक शहरों तक विमानन सुविधा पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। यह बात रविवार को केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री अशोक गजपति राजू ने कही।
राजू ने यहां एक समारोह में कहा, “हम अधिक विमानन कंपनी चाहते हैं। विमानन संपर्क तेज आर्थिक विकास के लिए जरूरी है। हमारी नई उड्डयन नीति से इस क्षेत्र का तेज विकास होगा और देश के अधिक से अधिक शहर विमानन सुविधा के दायरे में आ जाएंगे।”
मंत्री ने कहा कि नई नीति से विमानन क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। नई कंपनियों का उदय होगा और मौजूदा कंपनियों को घरेलू और विदेशी मार्गो पर पांव पसारने का मौका मिलेगा।
नई क्षेत्रीय विमानन सेवा एयर पेगासस के इस हवाईअड्डे पर लांच के मौके पर मंत्री ने कहा, “नई नीति से टिकाऊ विकास होगा। सभी हित धारकों को फायदा होगा, जिसमें खासकर यात्री और माल ढुलाई क्षेत्र शामिल हैं। करीब 30 हवाईअड्डों पर कोई गतिविधि नहीं होती है। उन्हें एक संपत्ति में बदलने के लिए लंबी रणनीति चाहिए।”
नई नीति का मसौदा हितधारकों के बीच वितरित कर दिया गया है। नीति का मकसद हवाई संपर्क बढ़ाना, छह महानगरीय हवाईअड्डों को अंतर्राष्ट्रीय हब में परिणत करना, सार्वजनिक-निजी साझेदारी द्वारा और अधिक हवाईअड्डों का विकास करना, विमानन ईंधन पर कर को तर्कसंगत बनाना, मालवाहक विमानन को बढ़ावा देना, रखरखाव, मरम्मत और संचालन (एमआरओ) को बढ़ावा देना, हेलीकॉप्टर संचालन को प्रोत्साहित करना और यात्री सुविधा बढ़ाना है।
राजू ने कहा, “हमने वित्त मंत्रालय से एमआरओ के लिए 5-10 साल के लिए कर छूट की मांग की है, ताकि विमानन कंपनी रखरखाव के लिए अपने विमान श्रीलंका, सिंगापुर और दुबई नहीं भेजे।”
राजू ने कहा कि उन्होंने राज्यों के मुख्यमंत्रियों से भी विमानन ईंधन पर वैट घटाने का अनुरोध किया है, क्योंकि विमानन कंपनियों के संचालन का 40-50 फीसदी खर्च ईंधन पर होता है।
उन्होंने बताया कि कुछ मुख्यमंत्रियों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, लेकिन कई ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
नई नीति 5/20 के मुद्दे का समाधान करेगी। मौजूदा नियमों के तहत किसी विमानन कंपनी को विदेश सेवा शुरू करने के लिए पांच साल का अनुभव और उनके बेड़े में कम से कम 20 विमान होना अनिवार्य है।
मंत्रालय ने दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, बेंगलुरू और हैदराबाद हवाईअड्डे का चुनाव विमान, यात्री और माल-ढुलाई के लिए प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय हब बनाने के लिए किया है।
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