नई दिल्ली, 15 जून (आईएएनएस)। सरकार की नई नागरिक उड्डयन नीति का उद्योग और हितधारकों ने बुधवार को स्वागत किया।
नई नीति में हवाई यात्रा को किफायती और सुविधाजनक बनाने के साथ ही अगले पांच साल में 30 करोड़ हवाई यात्रियों को सेवा देने लायक अवसंरचना तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों का संचालन करने से संबंधित नियमों में भी संशोधन किया गया है।
केंद्र सरकार ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में नई नागरिक उड्डयन नीति को मंजूरी दे दी।
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) की नागरिक उड्डयन समिति के सह-अध्यक्ष पलाश राय चौधरी ने कहा, “इस व्यापक और सुविचारित नीति से देश में उड्डयन क्षेत्र का संतुलित विकास होगा। प्रभावी कार्यान्वयन से यह भारतीय उड्डयन क्षेत्र में विकास और प्रतिस्पर्धात्मकता लाएगी, घरेलू हवाई यात्रा सस्ती होगी और भारत अंतर्राष्ट्रीय यात्रियों के लिए अधिक आसान गंतव्य बनेगा।”
एसोचैम महासचिव डी.एस. रावत ने कहा, “हवाई किराया की सीमा तय करने से जहां क्षेत्रीय गंतव्यों के बीच संपर्क बढ़ेगा और रेल के प्रथम श्रेणी के यात्रियों को एक सस्ता विकल्प मिलेगा, वहीं इस विचार के वाणिज्यिक पहलुओं को ठीक तरह से निर्धारित किया जाना चाहिए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कंपनियों को छोटे मार्गो पर नुकसान न हो।”
केपीएमजी इंडिया के साझेदार और एरोस्पेस और रक्षा प्रमुख अंबर दुबे ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि किस तरह से नागरिक उड्डयन सचिव आर.एन. चौबे ने 1947 के बाद से पहली बार प्रथम एकीकृत उड्डयन नीति में सभी हितधारकों के हितों का ध्यान रखा।
रॉलैंड बर्गर इंडिया के एरोस्पेस और रक्षा कारोबार के साझेदार राहुल गंगल ने कहा, “यह भारत को उड्डयन अनुकूल अर्थव्यवस्था बनाएगा और नेटवर्क का विस्तार करेगा।”
यात्रा डॉट कॉम के अध्यक्ष शरत धाल ने कहा, “5/20 नियम की समाप्ति से कई विमानन कंपनियों को राहत मिलेगी, जिन्होंने पिछले कुछ साल में बाजार में कदम रखा है और वे अंतर्राष्ट्रीय उड़ान सेवा शुरू करने में सक्षम बनेंगे।”
पीडब्ल्यूसी के एरोस्पेस और रक्षा साझेदार धीरज माथुर ने कहा कि 5/20 नियम में सुधार से नई कंपनियां आकर्षित होंगी और 20 विमानों की जरूरत वाजिब है।
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