गुड़गांव- केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को वामपंथी उग्रवादियों से अपील की कि वे अपने हथियार डाल दें और राष्ट्र की मुख्य धारा में शामिल हों। गुड़गांव में सीआरपीएफ की डॉयमंड जुबली परेड को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि नक्सली देश के कुछ हिस्सों में सक्रिय हैं और उन्हें हिंसा छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत जैसे लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं है और नक्सलियों को मुख्य धारा में शामिल होना चाहिए।
गृह मंत्री ने कहा कि सरकार अपने अर्धसैनिक बलों की जरूरतों के प्रति संवेदनशील है। भारतीय लोकतंत्र को बरकरार रखने वाले सीआरपीएफ को एक पुराना संगठन बताते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि सीआरपीएफ के जवानों द्वारा किए गए बलिदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के खिलाफ छेड़े गए ‘छद्म युद्ध’ का मुकाबला करते हुए सीआरपीएफ के अनेक जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दे दी। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ को अनेक महत्वपूर्ण इलाकों में तैनात किया गया है।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सीआरपीएफ प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करती है, लेकिन वह हमेशा उसे सौंपे गए कार्य को पूरा करती है। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ के 38 प्रतिशत जवान वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित खतरनाक क्षेत्रों में तैनात हैं और 80 प्रतिशत जवान जोखिम भरी जगहों में काम करते हैं।
गृह मंत्री ने झारखंड के सारंडा जंगल में अपनी यात्रा का स्मरण करते हुए कहा कि प्रतिकूल परिस्थितियों में काम करने की क्षमता के कारण सीआरपीएफ बधाई की पात्र है। सीआरपीएफ को लोकतंत्र का प्रहरी बताते हुए गृह मंत्री ने कहा कि सीआरपीएफ न केवल आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियों का मुकाबला करने में सक्रिय भूमिका निभाती है, बल्कि आम चुनावों के दौरान भी सुरक्षा प्रदान करती है।
उन्होंने अपनी स्थापना के 75 वर्ष पूरा करने पर सीआरपीएफ को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सीआरपीएफ ने अनेक अग्नि परीक्षाएं पास की हैं और उन्हें गर्व है कि वह प्रत्येक परीक्षा में सफल रही है। सीआरपीएफ दुनिया का सबसे बड़ा अर्धसैनिक बल है।
इस अवसर पर गृह मंत्री ने गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण किया और परेड की सलामी ली, जिसका नेतृत्व सीआरपीएफ की महिला टुकड़ी ने किया। उन्होंने सीआरपीएफ द्वारा इस्तेमाल में लाए जाने वाले हथियारों और अन्य उपकरणों को भी देखा। इससे पहले सीआरपीएफ ग्रुप सेंटर पहुंचने पर गृह मंत्री ने सीआरपीएफ के शहीद जवानों की स्मृति में बनाए गए स्मारक श्रद्धांजलि अर्पित की।
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