नागर विमानन नीति 2015 के प्रमुख बिंदू

नई दिल्ली, 30 अक्टूबर (आईएएनएस)। राष्ट्रीय नागर विमानन नीति 2015 शुक्रवार को नागर विमानन मंत्रालय की वेबसाइट पर जारी कर दिया गया, जिसके मुख्य बिंदू निम्नलिखित हैं:-

एक ऐसे माहौल का निर्माण करना, जिसमें घरेलू टिकट बिक्री की संख्या साल 2022 में बढ़कर 30 करोड़ और साल 2027 में बढ़कर 50 करोड़ हो जाए।

वित्तीय समर्थन व बुनियादी ढांचे में विकास के माध्यम से क्षेत्रीय संपर्क में बढ़ोतरी करना, प्रक्रियाओं व ई-गवर्नेस को सुलभ कर व्यापार करने की प्रक्रिया को आसान बनाना।

सुरक्षा उल्लंघन के प्रति कोई रियायत नहीं बरती जाएगी।

नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) विमानन संबंधी लेनदेन, प्रश्नों व शिकायतों के लिए एक एकल खिड़की का निर्माण करने का प्रयास करेगा।

डीजीसीए की सेवाएं एक अप्रैल, 2016 से पूरी तरह लागू हो जाएंगी।

डीजीसीए नागर विमानन की जरूरतों (सीएआर) की प्रत्येक पांच साल पर समीक्षा करेगा, जिसकी शुरुआत 2016-17 वित्त वर्ष से होगी।

उल्लंघन की प्रकृति के आधार पर डीजीसीए के पास जुर्माना करने का अधिकार होगा। इसके लिए जहां भी जरूरी होगा जरूरी संशोधन किए जाएंगे।

डीजीसीए अपने कर्मियों की नियुक्ति खुद सीधे तौर पर कर सकेगा।

नीति में क्षेत्रीय संपर्क बढ़ाने के लिए सस्ते हवाईअड्डों की स्थापना और विमानन कंपनियों के लिए व्यवहार्यता अंतराल वित्तपोषण प्रदान करना, क्षेत्रीय संपर्क योजना के तहत एक घंटे की उड़ान के लिए अधिकतम 2,500 रुपये के किराए की सीमा तय करना शामिल है।

क्षेत्रीय संपर्क योजना उन्हीं राज्यों में लागू होगी, जो इन हवाईअड्डों को एटीएफ पर वैट को एक फीसदी या उससे कम करते हैं, तथा मुफ्त में भूमि व मल्टी मॉडल हिंटरलैंड कनेक्टिविटी (सड़क, रेल, मेट्रो, समुद्री मार्ग इत्यादि) प्रदान करेंगे।

सरकार ने संबद्ध पक्षों से और टिप्पणी की मांग की है, जिसके तहत स्थानीय विमानन कंपनियां विदेश में तभी परिचालन कर सकती हैं, जब उनके पास पांच साल के परिचालन का अनुभव के बदले प्रति वर्ष 300 घरेलू उड़ान क्रेडिट (डीएफसी) हो और कम से कम 20 विमानों का बेड़ा हो।

विमानन कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को 49 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी से ऊपर करने की स्थिति की तब समीक्षा की जाएगी, जब सरकार पांच हजार किलोमीटर की त्रिज्या के दायरे में उड़ानों का परिचालन करती है।

एक अप्रैल, 2016 से हेलीकॉप्टरों के लिए अलग नियम होंगे।

भारत में भविष्य के हवाईअड्डों ग्रीनफील्ड व ब्राउनफील्ड दोनों में लागत कुशल ढंग से कार्य होगा।

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