वाशिंगटन, 23 दिसम्बर (आईएएनएस)। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने इस वर्ष मार्च में प्रस्तावित मंगल ग्रह के अहम अभियान को अस्थायी तौर पर रद्द कर दिया है।
मंगल ग्रह की आंतरिक संरचना पर शोध के लिए नासा अपने ‘इनसाइट’ (इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिक इनवेस्टिगेशन जीयोड्सी एंड हीट ट्रांसपोर्ट) अभियान के तहत अगले वर्ष मार्च में मंगल ग्रह पर अपना शोध अंतरिक्ष यान भेजने वाला था।
नासा ने यह निर्णय एक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष उपकरण की मरम्मत में असफल होने के बाद लिया है। नासा ने मंगलवार को एक बयान में यह जानकारी दी।
मंगल ग्रह की भूकंपीय जांच के लिए इस परीक्षण में एक विशेष सिस्मोमीटर (सिस्मिक एक्सपेरिमेंट फॉर इंटीरियर स्ट्रक्चर) का उपयोग किया जा रहा है, जिसे फ्रांस की अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी ‘सेंटर नेशनल डी इटूड्स स्पेटिएल्स’ (सीएनईएस ) ने विकसित किया है।
अतिसूक्ष्म भू हलचलों को मापने में सक्षम इस सिस्मोमीटर के तीन मुख्य सेंसर के चारो ओर वैक्यूम सुरक्षा पर्त की जरूरत है, ताकि ये सेंसर मंगल के जटिल वातावरण में खराब न हो। इसी उपकरण की सफलतापूर्वक मरम्मत न कर पाने के कारण अभियान को स्थगित किया गया है।
साल की शुरुआत में नासा ने इस वैक्यूम उपकरण की मरम्मत सफलतापूर्वक कर ली गई थी। इसलिए वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि यह नवीनतम प्रयास भी सफल रहेगा। सोमवार को इसकी दोबारा जांच की गई जहां अधिक ठंडे वातावरण में उपकरण वैक्यूम बूनाए रख पाने में असफल हो गया।
नासा अपने इस अभियान के जरिए मंगल ग्रह की आंतरिक संरचना संबंधी, जैसे भूकंपीय हलचल, भूगणित और मंगल ग्रह पर अत्यधिक तापमान के बारे में शोध करने वाला था।
वाशिंगटन स्थित नासा के साइंस मिशन डॉइरेक्टोरेट के सहायक प्रबंधक जॉन ग्रंसफील्ड ने बताया, “विज्ञान को अधिक सक्षम करने के लिए हम इस मिशन के सहारे अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी की ऊंचाइयां छूना चाहते थे, लेकिन अभी हम 2016 मिशन के लिए तैयार नहीं हैं।”
जॉन ने बताया, “इस अभियान पर अगला निर्णय आने वाले महीनों में किया जाएगा लेकिन नासा मंगल ग्रह की वैज्ञानिक खोज और अन्वेषण को लेकर पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।”
आंतरिक जांचकर्ता ब्रूस बैनडर्ट के अनुसार, “मंगल ग्रह की आंतरिक जांच के लिए नासा के इनसाइट अभियान का उद्देश्य पृथ्वी के समान चट्टान निर्मित अन्य खगोलीय पिंडो के उद्भव और निर्माण की प्रक्रिया को बेहतर तरीके से समझना है।”
वैज्ञानिकों का कहना है कि जल्द ही हम इस कमी को दूर कर लेंगे लेकिन मार्च, 2016 तक यह संभव नहीं है। इसलिए अभी इस मिशन पर फिलहाल रोक लगा दी गई है।
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