नि:शक्त भी समान व्यवहार के हकदार : खुशबू गनोत्रा

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुंबई की रहने वाली खुशबू गनोत्रा चल नहीं सकतीं, लेकिन वह पावर लिफ्टर हैं..टेनिस खेलती हैं..और वीडियो एडिटिंग भी करती हैं। जन्म से ही स्पाइना बाइफिडा रोग से पीड़ित खुशबू व्हीलचेयर पर देशभर के लोगों में जीने का जज्बा भर रही हैं। खुशबू का लक्ष्य अगले पैरालंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।

नई दिल्ली, 21 अगस्त (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के मुंबई की रहने वाली खुशबू गनोत्रा चल नहीं सकतीं, लेकिन वह पावर लिफ्टर हैं..टेनिस खेलती हैं..और वीडियो एडिटिंग भी करती हैं। जन्म से ही स्पाइना बाइफिडा रोग से पीड़ित खुशबू व्हीलचेयर पर देशभर के लोगों में जीने का जज्बा भर रही हैं। खुशबू का लक्ष्य अगले पैरालंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।

खुशबू को स्पाइना बिफिडा फाउंडेशन ऑफ इंडिया के हालिया 28वें अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रम में बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने सम्मानित किया था।

खुशबू से जब पूछा गया कि इतने लोगों के बीच सम्मानित महसूस होकर कैसा लगा, इस पर खुशबू ने आईएएनएस को एक खास बातचीत में बताया, “मुझे यहां आकर बहुत अच्छा लगा। मैं जाह्न्वी (खुशबू की मेंटर) मैम की शुक्रगुजार हूं कि उन्होंने मुझे यहां तक पहुंचाया। मुझे बहुत बाद में पता चला कि दुनियाभर में कई लोग स्पाइना बाइफिडा से पीड़ित हैं। पहले मुझे लगता था कि मैं ही ऐसी हूं। लेकिन ऐसा नहीं है कि बहुत सारे लोग इस तरह के हैं। मैं चाहती हूं कि इस रोग से पीड़ित सभी लोग आत्मनिर्भर बनें।”

खुशबू की मां ने अकेले उनकी और उनके भाई की परवरिश की। लेकिन एक सड़क दुर्घटना में खुशबू के भाई की मौत हो गई। इतनी चुनौतियों के बावजूद खुशबू ने हार नहीं मानी और अब वह अपने जैसे लोगों को जीने और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

खुशबू कहती हैं, “मेरी मां ने मेरी कमजोरी को कभी मेरी बाधा नहीं बनने दिया। वह मेरा पूरा समर्थन करती हैं। उन्होंने सामान्य बच्चों में और मुझमें कोई फर्क नहीं किया और मुझ पर पूरी जिम्मेदारी डाली।”

वह कहती हैं, “चूंकि वह अकेली थीं और काम के सिलसिले में बाहर जाती थीं, इसलिए उन्होंने मुझे पूरी तरह स्वतंत्र और आत्मनिर्भर बनाया। उन्होंने इस बात पर ध्यान नहीं दिया कि मेरा बच्चा व्हीलचेयर पर है तो वह कैसे रहेगा, क्या करेगा। उन्होंने मुझे एक सामान्य बच्चे की तरह ही पाला। मैं बतौर वीडियो एडिटर के तौर पर काम करती हूं और मैं आर्थिक रूप से सशक्त हूं। लेकिन मेरा लक्ष्य 2020 के पैरालंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना है।”

चुनौतियों का कैसे सामना किया? इस पर खुशबू ने कहा, “मेरी मां की परवरिश ऐसी थी कि मुझे चुनौतियों से कोई डर नहीं लगा। मुझे अपने खेल की वजह से हर महीने एक-एक सप्ताह के लिए कहीं न कहीं जाना होता है और मैं हर जगह अकेले जाती हूं।”

आप पेशेवर पावरलिफ्टिंग कर रही हैं और ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करना चाहती हैं, सरकार की ओर से कोई मदद मिली है? इस सवाल पर खुशबू ने कहा, “जी नहीं, मुझे सरकार से कोई मदद नहीं मिली है। मैंने खुद मुंबई में एक कार्यक्रम आयोजित किया था, जहां पर समान्य लोगों और नि:शक्त लोगों का एक साथ टेनिस मैच रखा गया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह संदेश देना था कि सामान्य और नि:शक्त दोनों में कोई अंतर नहीं है, केवल सोच का फेर है। सामान्य लोग जैसे अपने पैरों पर खेलते हैं, वैसे ही हम अपनी व्हीलचेयर पर खेलते हैं।”

उन्होंने कहा, “अभी हाल ही में हुए पैरालंपिक खेलों में भारत को काफी कामयाबी मिली थी। इनमें से कितने सारे खिलाड़ी थे जिन्हें सरकार की तरफ से कोई सहायता नहीं मिली। वे खुद जद्दोजहद कर वहां पहुंचे और सफलता हासिल की। हमें खुद को साबित करना पड़ता है तब कहीं जाकर लोग हमारा समर्थन करते हैं।”

व्हीलचेयर पर होने के बावजूद बाकी लोगों से कदम से कदम मिलाकर चल रहे लोगों की तरफ से समाज और सरकार से क्या कहना चाहेंगी? उन्होंने कहा, “मैं बस यही कहना चाहती हूं कि हर इंसान को एक नजर से देखें। व्हीलचेयर पर बैठा व्यक्ति भी एक इंसान है। हम किसी अंग से लाचार हैं तो क्या हुआ, कोई फर्क न करें।”

खुशबू चाहती हैं कि सार्वजनिक स्थानों, जैसे- खेल के मैदान पर नि:शक्त लोगों के साथ सामान्य लोगों जैसा व्यवहार होना चाहिए। वह कहती हैं, “मुझे कई बार लोगों ने टेनिस कोर्ट में प्रवेश करने से मना किया, यह कहकर कि आप व्हीलचेयर पर हैं, आपको प्रवेश नहीं मिल सकता, कोर्ट खराब हो जाएगा। ऐसी चीजें नहीं होनी चाहिए।”

About admin


Notice: ob_end_flush(): Failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home4/dharmrcw/public_html/wp-includes/functions.php on line 5493