नेपाल भूकम्प से स्पेस वेधर में आया बदलाव

वड़ोदरा, 3 मई (आईएएनएस)। नेपाल के भूकम्प ने सभी को दहला दिया है। इस भूकंप ने पृथ्वी के साथ ही अंतरिक्ष पर भी अपना असर छोड़ा है। भूकंप के कारण स्पेस वेधर यानी अंतरिक्ष के वातावरण में भी बदलाव आ गया है। इस घटना ने विज्ञान के लिए नई जानकारी के लिए विवश कर दिया।

यह बात वड़ोदरा स्थित गुरुदेव वेधशाला के खगोलशास्त्री दिव्यदर्शन पुरोहित ने कही है।

पुरोहित के अनुसार, इस भूकंप के कारण पृथ्वी और अंतरिक्ष में आए बदलाव निम्न प्रकार हैं-

भूमि में आया बदलाव :

नासा यूरोपियन स्पेस एजेंसीस के उपग्रहीय चित्रों ने नेपाल की धरती में आया बदलाव देखा। सेंटिनल और कोपरनिकस उपग्रह से प्राप्त चित्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कई जगह भूमि नीचे चली गई है तो कई जगह ऊपर उठ गई है।

भूकम्प से स्पेस वेधर में बदलाव :

यह सबसे नई बात पहली बार सामने आई है। भूकम्प से न केवल पृथ्वी की सतह का नक्शा बदलता है, बल्कि अयन मंडल भी इससे बदल जाता है। न केवल सूर्य बल्कि भूकम्प, सुनामी, ज्वालामुखी जैसी त्रासदियों से भी स्पेस वेधर में बदलाव आता है, यह बात सामने आई है।

अयन मंडल क्या है :

अयन मंडल पृथ्वी की सतह से 60 किलोमीटर ऊपर से 1000 किलोमीटर तक जाता है। जो सूर्य की पराबैगनी किरणों से स्पेस वेधर को जन्म देता है और इससे पृथ्वी प्रभावित होती है।

नेपाल भूकम्प से स्पेस वेधर में आया बदलाव :

नासा ने नेपाल के भूकम्प से ऐसे ही स्पेस वेधर में बदलाव की पुष्टि की है। तिब्बत के ल्हासा में स्थित वैज्ञानिक प्रणाली से प्राप्त तरंगों के अध्ययन से पता चला है कि नेपाल के एपी सेंटर के ठीक ऊपर वाले अयनमंडल में भूकम्प के दौरान जबरदस्त बदलाव देखा गया है। इस बदलाव के कम्पनों को अयन मंडल से ल्हासा तक 640 किलोमीटर की दूरी तय करने में 21 मिनिट लगे थे। साथ में दिए गए चित्र में आप उन किरणों में बदलाव देख सकते हैं।

क्या करने की जरूरत है :

पृथ्वी कैसे स्वयं ज्वालामुखी, भूकम्प, सुनामी के जरिए स्पेस वेधर को जन्म देती है, यह समझने की अब जरूरत है। साथ ही ऐसी भूकम्प मापन प्रणाली विकसित करने की भी जरूरत है, जो समय रहते लोगों को सूचित कर सके, चाहे उसके लिए हमें कुदरत का ही सहारा क्यों न लेना पड़े।

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