काठमांडू, 1 दिसम्बर (आईएएनएस)। नेपाल में नाकेबंदी का जिम्मेदार भारत को ठहराते हुए मंगलवार को वाम मोर्चा के दो सांसदों ने नेपाल में भारत के राजदूत को नई दिल्ली वापस भेजने की मांग की।
नेपाल वर्कर्स एंड पीजैंट्स पार्टी (एनडब्ल्यू) के दो सांसदों प्रेम सुवल तथा अनुराधा थापा ने देश में लगभग तीन महीने की नाकेबंदी के लिए नेपाल में भारत के राजदूत रंजीत राय को जिम्मेदार ठहराया और उनके खिलाफ नारे लगाए।
सांसदों ने नारे लगाते हुए कहा, “नेपाल के संविधान में हस्तक्षेप करने वाला भारत कौन है? देश को कोई खंडित नहीं कर सकता! भारतीय राजदूत को वापस भारत भेजो।”
उन्होंने भारतीय पुलिस के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की, जिन्होंने पिछले सप्ताह दावा किया कि उनकी गोलीबारी में चार नेपाली नागरिकों की मौत हो गई।
मधेस आधारित राजनीतिक दलों के सदस्यों द्वारा आंदोलन व अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाने के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।
मधेस आधारित राजनीतिक दल व नस्लीय समूह नेपाल के दक्षिणी मैदानी हिस्से में बीते तीन महीनों से आंदोलनरत हैं। आंदोलनकारी देश के नए संविधान में प्रस्तावित प्रांतों का पुन: सीमांकन व आबादी व संसद में आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों की स्थापना की मांग कर रहे हैं।
आंदोलन के हिंसक होने के कारण अब तक कम से कम 50 लोगों की जान जा चुकी है और यातायात अवरुद्ध है, जिसके कारण पूरे देश में आवश्यक वस्तुओं की कमी हो गई है।
नेपाल ने नाकेबंदी का आरोप भारत पर लगाया है, जबकि नई दिल्ली का कहना है कि नेपाल के हालात उसके खुद के बनाए हुए हैं और इसका समाधान मधेस आधारित प्रदर्शनकारी समूहों के साथ सार्थक वार्ता से होगा।
dharmpath.com dharmpath