नोटबंदी के बाद अब होगी भाजपा बंदी : अजित सिंह (फोटो सहित)

अजित सिंह ने कहा कि किसानों के साथ छल करने वाली केंद्र की भाजपा सरकार की पोल खुल चुकी है। प्रधानमंत्री बनने से पहले नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सभी के खाते में 15-15 लाख रुपये आएंगे, लेकिन नोटबंदी कर हालत यह कर दी कि लोग अपने रुपये निकालने के लिए तरस गए हैं, धक्के खाते फिर रहे हैं, जान तक गंवानी पड़ रही है।

उन्होंने कहा कि मोदी ने हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा भी किया था, जो खोखला साबित हो गया और नोटबंदी के बाद उलटे सैकड़ों की नौकरी छूट गई, हजारों मजदूर बेरोजगार हो गए।

रालोद प्रमुख ने कहा कि मोदी सरकार न गन्ना, न गेहूं, न आलू किसी का भी किसानों को उचित दाम नहीं दे सकी। मोदी अब भोली भाली जनता को अपनी चिकनी-चुपड़ी बातों से गुमराह नहीं कर पाएंगे, क्योंकि अब तो भाजपाबंदी होनी तय है।

रैली में पहुंचे जदयू के पूर्व अध्यक्ष व सांसद शरद यादव, रालोद के राष्ट्रीय महासचिव व पूर्व सांसद जयंत चौधरी ने भी किसानों का उत्साहवर्धन किया और केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला।

जयंत चौधरी ने कहा कि अब समय आ गया है कि किसानों को एकजुट होकर किसान विरोधी ताकतों को मुंहतोड़ जवाब देना होगा। मोदी को देश के पूर्व प्रधानमंत्री और किसानों के मसीहा चौ. चरण सिंह की जयंती याद नहीं रहता, लेकिन दुश्मन मुल्क के प्रधानमंत्री को जन्मदिन की शुभकामनाएं देना नहीं भूलते।

उन्होंने कहा कि मोदी के तानाशाही फैसले से 100 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, इसका जिम्मेदार कौन है? इसकी जिम्मेदारी मोदी को लेनी चाहिए और मृतकों के परिवार को मुआवजा देना चाहिए, लेकिन मोदी इन मौतों पर चुप्पी साधे हुए हैं और भोली भाली जनता को गुमराह कर देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे हैं।

जयंत ने कहा कि मोदी सरकार किसान विरोधी है, इस सरकार को सिर्फ बड़े-बड़े उद्योगपति दिखाई देते हैं। ऑस्ट्रेलिया और युक्रेन से सस्ता गेहूं खरीदकर भारत का बाजार पाटने की नीति छोटे किसानों के लिए घातक है। अभी 26 दिसंबर को गेहूं पर आयात शुल्क खत्म करने के खिलाफ और किसानों की कर्जमाफी को लेकर लखनऊ में राज्यपाल को ज्ञापन दिया गया है।

वहीं, सांसद शरद यादव ने कहा कि विजय माल्या को भगाने के बाद भाजपा को पूंजीपतियों के कर्ज से उबारने के लिए उनका कर्ज माफ कर दिया गया। बैंक डूबने लगे, बैंकों को डूबने से बचाने के लिए नोटबंदी की गई। बैंकों में जमा किसान मजदूर के हक का लाखों करोड़ों रुपया इस सरकार ने चंद उद्योगपतियों को दे दिए हैं। तमाम छोटे उद्योग बंद होने के कगार पर हैं और लाखों लोग बेरोजगार हो गए हैं।

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