नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियिम (एनजेएसी) और इससे संबंधित संविधान संशोधन की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई बुधवार को स्थगित कर दी गई, क्योंकि याचिकाकर्ता एससीएओआरए की आपत्तियों के बाद न्यायमूर्ति अनिल आर.दवे ने संविधान पीठ से खुद को अलग कर लिया।
सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट-ऑन-रिकार्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) की तरफ से न्यायालय में पेश हुए वरिष्ठ वकील फली नरीमन ने यह घोषणा करने की मांग की कि न्यायमूर्ति दवे एनजेएसी की सुनवाई में हिस्सा नहीं लेंगे। इसके बाद न्यायमूर्ति दवे ने खुद को मामले से अलग कर लिया।
न्यायालय को भेजी गई टिप्पणी में एससीएओआरए ने कहा कि संविधान (99वां संशोधन) अधिनियम 2014 और राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग अधिनियम, 2014 को अधिसूचित किए जाने के बाद “न्यायमूर्ति दवे (इच्छा से नहीं बल्कि कानूनन) राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग के पदेन सदस्य बन गए हैं, जिसकी संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है।”
एससीएओआरए ने कहा कि यह उचित होगा अगर यह घोषित किया जाए कि इस पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायाधीश राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग की सुनवाइयों में हिस्सा नहीं लेंगे।
न्यायमूर्ति दवे संविधान पीठ के वरिष्ठ न्यायाधीश होने के नाते इसकी अध्यक्षता कर रहे थे। एससीएओआरए की तरफ से स्पष्टीकरण की मांग किए जाने पर उन्होंने मामले से खुद को अलग कर लिया।
न्यायमूर्ति दवे के अतिरिक्त न्यायमूर्ति जे.चेलमेश्वर, न्यायमूर्ति मदन बी.लोकुर, न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ और न्यायमूर्ति आदर्श कुमार गोयल इस पीठ के सदस्य हैं।
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