नई दिल्ली, 7 दिसम्बर (आईएएनएस)। सर्वोच्च न्यायालय ने मुस्लिम महिलाओं के साथ होने वाले कथित भेदभाव को रोकने के लिए संसद को एक समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई करने से सोमवार को इंकार कर दिया।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी.एस. ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले में संसद को निर्णय लेना है। इस पर निर्देश देना सर्वोच्च न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में नहीं है।
प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति ठाकुर ने वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम से कहा कि अगर ऐसी याचिकाएं कानून को ध्यान में रखे बिना ही दायर की जाती रहेंगी तो अदालत पर बोझ बढ़ेगा।
न्यायालय ने सवाल किया कि जो लोग कथित तौर पर इस भेदभाव का शिकार हैं, वे इसके निवारण के लिए आगे क्यों नहीं आते।
यह जनहित याचिकचा अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की थी।
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