नई दिल्ली, 18 दिसम्बर (आईएएनएस)। नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन का कहना है कि हरियाणा सरकार ने पंचायत चुनाव लड़ने के लिए जो शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य तौर पर निर्धारित की है और जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा है, उसकी समीक्षा होनी चाहिए और उस पर संविधान पीठ को विचार करना चाहिए।
सेन ने यहां गुरुवार देर शाम अपनी नई किताब ‘द कंट्री ऑफ फर्स्ट बॉयज’ पर चर्चा के दौरान कहा, “हमें हमारे उद्देश्यों और देश की दशा के बीच अंतर करने की जरूरत है.. इसका अर्थ यह नहीं है कि हर किसी को साक्षर होना चाहिए और सबके घरों में शौचालय होना चाहिए और जब तक ऐसा न हो तब तक लोगों को उनके अधिकारों से वंचित कर दिया जाए।”
उन्होंने कहा, “जो लोग पहले से ही सुविधाओं से वंचित हैं, हम उन्हें वंचित नहीं रख सकते और उनके विशेषाधिकारों को छीन नहीं सकते।”
सेन ने सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ से इस मामले की सुनवाई का भी आह्वान किया।
हरियाणा विधानसभा ने सितंबर में इस संबंध में एक विधेयक पारित किया था, जिसमें पंचायत चुनाव लड़ने के इच्छुक लोगों के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य करने की बात कही गई और यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि उनके घरों में शौचालय हों।
सर्वोच्च न्यायालय ने 11 दिसंबर को हरियाणा सरकार के इस कानून को सही ठहराते हुए कहा था कि पंचायत चुनावों में न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवार ही हिस्सा ले सकते हैं।
नए नियम के तहत चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों के लिए 10वीं तक की पढ़ाई अनिवार्य है।
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