पन्ना बाघ पुनर्स्थापना:चार वर्ष में शून्य से 23 हुए बाघ

020114n3हीरे के लिये विख्यात पन्ना ने विश्व के समक्ष एक नई मिसाल कायम की है। पन्ना टाइगर रिजर्व ने यहाँ समाप्त हो चुकी बाघ प्रजाति को पुन: स्थापित करने में न केवल अभूतपूर्व सफलता हासिल की है बल्कि बाघ पुन: स्थापना के 4 वर्ष पूरे कर लिये हैं। बाघ शून्य हो चुके इस रिजर्व में आज 23 बाघ विचर रहे हैं। इसके पूर्व यह माना जाता था कि बाघ प्रजाति को किसी नये क्षेत्र में स्थापित किया जाना लगभग असंभव है।

वन मंत्री डॉ. गौरीशंकर शेजवार ने बताया कि पन्ना में बाघ पुन: स्थापना योजना नवम्बर 2009 में शुरू की गई थी। चार वर्ष पूर्व यहाँ एक नर और चार मादा बाघ को अन्य क्षेत्रों से लाकर छोड़ा गया था। चार बाघिन में से अभी तक बाघिन टी-1 दो बार एवं टी-2 और टी-4 तीन-तीन बार शावक को जन्म दे चुकी हैं। टी-1 के प्रथम लिटर के दो नर बाघ संतान ने पार्क में अपना क्षेत्र स्थापित कर लिया है। इसी तरह टी-2 और टी-4 ने अपने दूसरी बार जन्में शावकों को महज 12-13 माह की उम्र में अपने से अलग कर दिया। वर्तमान में टी-2 और टी-4 अपने 5 माह के शावकों के साथ रह रही हैं।

पन्ना टाइगर रिजर्व में बड़े होते बाघ शावकों को रेडियो कॉलर पहनाये जा रहे हैं। परन्तु अभी पन्ना-412, पन्ना-221 और पन्ना-222 को रेडियो कॉलर पहनाने के प्रयासों को सफलता नहीं मिली है। इसका मुख्य कारण इन बाघ की उम्र कम होना है। रिजर्व में बाघ सभी दिशाओं में स्वयं को स्थापित कर रहे हैं। बाघ शावक प्राकृतिक रूप से बड़े हो रहे हैं। परन्तु पन्ना-212 दो बार अपना किल पकड़ने में और एक बार रेबीज कुत्ते द्वारा घायल हो चुका है। यह अपने दो दाँत भी खो चुका है।

दो बाघिन और लाई जायेंगी

वन मंत्री डॉ. शेजवार ने बताया कि वर्तमान में पन्ना टाइगर रिजर्व में बाघों का लिंगानुपात अंसतुलित हो गया है। पार्क में जन्में बाघों में नर बाघ अधिक हो गये हैं। अन्य क्षेत्रों से यहाँ दो बाघिन को लाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पार्क प्रबंधन ने कुछ नर बाघ को यहाँ से बाहर ले जाने की अनुमति भी प्राप्त कर ली हैं। बाघ पुनर्स्थापना योजना के प्रथम चरण के प्राप्त अनुभव के आधार पर द्वितीय चरण की योजना बनाई गई है।

स्थानीय तौर पर बाघ, वन एवं वन्य-प्राणी के प्रति जागरूकता लाने के लिये विगत 4 वर्ष से पन्ना नेचर केम्प आयोजित किये जा रहे हैं। कुल 72 केम्प में 2105 प्रतिभागी भाग ले चुके हैं। इसके साथ ही लगातार पन्ना पार्क से जुड़े अलग-अलग स्टेक होल्डर के साथ संवाद एवं चर्चा का सिलसिला जारी है। फलस्वरूप बाघ पुन: स्थापना योजना के प्रति लोगों में बेहतर समझ आई है।

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