इन नियमों में अभयारण्य में उत्खनन, मिट्टी के नमूने लेने और खनन सहित उन सभी गतिविधियों पर प्रतिबंध लगा दिया है, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं।
इसके साथ ही वन्य जीवन को प्रभावित करने वाले निर्माण कार्यो और पर्यटन पर भी रोक लगा दी गई है। इन नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 600,000 युआन (92,000 अमेरिकी डॉलर) का जुर्माना लगाया जाएगा।
किंघाई-तिब्बत पठार में 45,000 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में स्थित हो-शिल अभयारण्य में कई लुप्तप्राय प्रजातियां रहती हैं, जिसमें तिब्बेतचन एंटेलोप शामिल हैं।
शोधकर्ताओं और शिक्षकों के कार्य में मदद हेतु अभयारण्य के संसाधनों पर आधारित एक डेटा तैयार किया जाएगा।
अभयारण्य स्वयं को 2017 में यूनेस्को की विश्व प्राकृतिक धरोहर के रूप में सूचीबद्ध करने की ओर भी कार्य कर रहा है।
dharmpath.com dharmpath